नई दिल्ली: कम उम्र में पित्त की थैली (गॉल ब्लैडर) में पथरी की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसे लेकर विशेषज्ञ भी चिंता जता रहे हैं। पहले जहां यह समस्या अधिक उम्र में देखने को मिलती थी, अब 20 से 40 वर्ष की उम्र के युवाओं में इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। खराब खानपान, अनियमित दिनचर्या और तेजी से वजन घटाने जैसी आदतें इसके प्रमुख कारण मानी जा रही हैं।
गॉल ब्लैडर में कैसे बनती है पथरी
विशेषज्ञों के अनुसार गॉल ब्लैडर में पथरी तब बनती है जब पित्त (बाइल) में कोलेस्ट्रॉल या बिलीरुबिन की मात्रा असंतुलित हो जाती है। यह पदार्थ धीरे-धीरे जमकर छोटे-छोटे क्रिस्टल बनाते हैं, जो आगे चलकर स्टोन का रूप ले लेते हैं। यह स्टोन दो प्रकार के होते हैं—कोलेस्ट्रॉल स्टोन और पिगमेंट स्टोन।
युवाओं में क्यों बढ़ रहा है खतरा
चिकित्सकों के अनुसार युवाओं में पिगमेंट स्टोन अधिक देखने को मिलते हैं, जो रक्त के टूटने (हेमोलाइसिस) की प्रक्रिया से बनते हैं। वहीं कोलेस्ट्रॉल स्टोन मेटाबॉलिक गड़बड़ी के कारण होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जेनेटिक कारण भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। तेजी से वजन कम करना, लंबे समय तक भूखा रहना और अनियमित भोजन इसकी संभावना बढ़ा देते हैं।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
गॉल ब्लैडर स्टोन की स्थिति में पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से या बीच में तेज दर्द महसूस हो सकता है। कई मामलों में यह दर्द खाने के बाद बढ़ जाता है। कुछ लोगों में उल्टी, अपच और पेट में भारीपन जैसे लक्षण भी दिखाई देते हैं।
बचाव के लिए जरूरी हैं ये आदतें
विशेषज्ञों के अनुसार गॉल स्टोन के खतरे को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता, लेकिन कुछ आदतों से इसे काफी हद तक रोका जा सकता है। तेजी से वजन घटाने वाली डाइट से बचना चाहिए और लंबे समय तक भूखे नहीं रहना चाहिए। तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड जैसे समोसा, पिज्जा और बर्गर का सेवन कम करना चाहिए।
फाइबर युक्त आहार है फायदेमंद
ओट्स, दालें, फल, हरी सब्जियां और साबुत अनाज जैसे फाइबर युक्त भोजन पित्त की थैली को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। नियमित समय पर भोजन करना और नाश्ता स्किप न करना भी जरूरी माना जाता है।