शरीर के इन अंगों के फड़कने से मिलता है शुभ फल, ये अंग फड़के तो आती है तबाही

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नई दिल्ली : शरीर के किसी अंग के फड़कने का वैज्ञानिक और चिकित्सकीय कारण उस अंग विशेष में ब्लड फ्लो में कुछ अनियमितता माना जाता है, किंतु समुद्र शास्त्र ने अंगों के फड़कने या स्फुरण को अलग तरीके से परिभाषित करते हुए इसे भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत बताया है. अंग फड़कना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और यह कभी भी यानी सोते जागते या किसी कार्य को करते समय भी हो सकता है.

महिला या पुरुष दोनों में ही मस्तक का फड़कना शुभ फल देने वाला होता है. सामान्य तौर पर महिलाओं का बायां और पुरुषों के दाहिने अंग का फड़कना शुभ माना जाता है. महिलाओं का दाहिना और पुरुषों का बायां अंग फड़कना अशुभ फल देता है. कभी भी अशुभ फल देने वाला अंग फड़के तो यथा शक्ति दान देकर उसकी तीव्रता को कम किया जा सकता है. मस्तक के फड़कने से भूमि संबंधी लाभ की प्राप्ति होती है. हो सकता है परिवार में आपको भूमि प्राप्त हो या फिर भूमि संबंधी किसी विवाद में विजय प्राप्त होने पर भूमि मिले. रुके हुए कार्यों में (वह किसी भी फील्ड से संबंधित हो सकता है) उसके बनने का भी संकेत होता है. मस्तक की जगह ललाट में फड़कन होने पर स्थान का लाभ प्राप्त होता है.

दोनों भौहों में एक साथ फड़कन सुख दिलाता है और यदि दोनों भौहों के बीच के हिस्से का फड़कना महसूस हो तो कोई बहुत बड़े सुख की प्राप्ति होती है. आंखों का फड़कना किसी बहुत ही अपने प्रिय से मिलन कराता है, जबकि आंख के कोने की फड़कन धन लाभ कराती है और यदि आंख के पास के हिस्से में अचानक फड़कन होने लगे तो समझा जा सकता है कि अपने किन्हीं निकटतम लोगों के साथ गपशप करने का मौका मिलने वाला है. यह निकटतम मित्र मंडली के लोग भी हो सकते हैं और बढ़िया निभाने वाले रिश्तेदार या पड़ोसी भी हो सकते हैं. आंखों के ऊपरी हिस्से के फड़कने से विजय मिलती है.

 

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