मातोश्री में बढ़ी बेचैनी! बैठक में सिर्फ 4 सांसद पहुंचे, 5 ने बनाई वर्चुअल दूरी; क्या उद्धव ठाकरे की पार्टी में होने वाली है बड़ी टूट?
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस में हालिया घटनाक्रम के बाद अब शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इसी बीच मातोश्री में आयोजित सांसदों की बैठक ने राजनीतिक गलियारों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बैठक में पार्टी के केवल चार सांसदों की प्रत्यक्ष मौजूदगी और पांच सांसदों का वर्चुअल रूप से शामिल होना चर्चा का विषय बन गया है।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के भीतर चल रही नाराजगी और कथित “ऑपरेशन टाइगर” की चर्चाओं के बीच शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे लगातार डैमेज कंट्रोल की कोशिशों में जुटे हैं। इसी क्रम में उन्होंने आगामी विधानसभा सत्र को लेकर पार्टी विधायकों की बैठक भी बुलाई है। यह बैठक 22 जून को विधानसभा सत्र के पहले दिन शिवालय में आयोजित होगी, जिसमें पार्टी की रणनीति और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
क्या उद्धव का साथ छोड़ सकते हैं कई सांसद?
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों यह चर्चा जोरों पर है कि पार्टी के कुछ सांसद शिवसेना के दूसरे गुट का रुख कर सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे लगातार सांसदों के संपर्क में बताए जा रहे हैं। दोनों नेता व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत कर असंतोष दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, सोमवार को बुलाई गई अहम बैठक में केवल चार सांसदों की शारीरिक उपस्थिति ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।
बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?
मातोश्री में हुई बैठक में अरविंद सावंत, अनिल देसाई, संजय दीना पाटिल और राजाभाऊ वाजे शामिल हुए। वहीं ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल अष्टिकर, संजय देशमुख और संजय जाधव वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।
यही वजह है कि विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि क्या पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य है या फिर अंदरखाने कोई बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम आकार ले रहा है।
बैठक में भावुक हुए उद्धव ठाकरे
सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही आज परिस्थितियां उनके पक्ष में न हों, लेकिन भविष्य उनका होगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं और नेताओं से संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे ने चार वर्ष पहले हुई बगावत का भी जिक्र किया और कहा कि पार्टी के सभी सांसद एकजुट हैं तथा संगठन के साथ मजबूती से खड़े हैं।
‘ऑपरेशन टाइगर’ ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कथित “ऑपरेशन टाइगर” को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। दावा किया जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं और सांसदों को अपने पाले में लाने के लिए राजनीतिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ सांसदों की मुलाकातें और राजनीतिक संपर्क भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। हालांकि, इन दावों को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
संजय राउत का पलटवार
पार्टी की ओर से इन अटकलों को खारिज करने की कोशिश भी जारी है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कथित “ऑपरेशन टाइगर” को असफल बताते हुए कहा कि यह अभियान अब पूरी तरह निष्प्रभावी हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी मजबूती से खड़ी है और किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से प्रभावित नहीं होगी।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ती गतिविधियों के बीच अब सभी की नजर आगामी दिनों में होने वाली बैठकों और संभावित राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हुई है।