UP-Rajasthan Weather: यूपी-राजस्थान में कब होगी मानसून की विदाई? मौसम विभाग ने बताया समय, दिल्ली-पंजाब-हरियाणा का भी अपडेट

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नई दिल्ली: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे कमजोर पड़ रहा है और इसकी वापसी की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। उत्तर-पश्चिम भारत से मानसून की विदाई की सामान्य तारीख 17-18 सितंबर मानी जाती है, लेकिन इस साल इसमें कुछ देरी हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले कुछ दिनों में राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों से मानसून की विदाई शुरू हो सकती है।

राजस्थान से 19 सितंबर के आसपास वापसी के आसार

मौसम विभाग के अनुसार, राजस्थान के कई हिस्सों से इस सप्ताह मानसून की वापसी शुरू हो सकती है। मौसम केंद्र जयपुर के मुताबिक, पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों में 19 सितंबर के आसपास बारिश की गतिविधियों में कमी आने और मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना है। ऐसे में 19 सितंबर के बाद राजस्थान से मानसून की विदाई शुरू हो सकती है।

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 20-21 सितंबर के बाद बदलाव

दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भी आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियों में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है। इसके बाद आसमान साफ होने और वातावरण में नमी घटने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, इन क्षेत्रों से 20-21 सितंबर के बाद मानसून की विदाई हो सकती है।

उत्तर प्रदेश से 22 सितंबर के आसपास लौट सकता है मानसून

उत्तर प्रदेश में भी अगले एक सप्ताह के दौरान मानसून की विदाई की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई जिलों में बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे कम हो सकती हैं और 22 सितंबर से दक्षिण-पश्चिम मानसून उत्तर प्रदेश से वापस लौटना शुरू कर सकता है।

फिलहाल सौराष्ट्र और उससे सटे उत्तर-पूर्वी अरब सागर से लेकर बीकानेर, चूरू, बरेली, गोरखपुर, पटना, रांची और कोलकाता होते हुए उत्तर-पूर्वी बंगाल की खाड़ी तक फैला कम दबाव वाला क्षेत्र प्रदेश के मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसके प्रभाव से उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में पिछले 24 घंटे के दौरान तेज बारिश दर्ज की गई है।

अचानक नहीं होती मानसून की वापसी

मानसून की वापसी एक साथ या रातों-रात नहीं होती है। मौसम विभाग 1 सितंबर के बाद किसी क्षेत्र से मानसून की वापसी की घोषणा तभी करता है, जब तीन प्रमुख संकेत दिखाई दें। इनमें लगातार पांच दिनों तक बारिश नहीं होना, निचले वायुमंडल में सूखी हवाओं का चलना और उच्च दबाव वाले तंत्र का बनना शामिल है।

जैसे-जैसे सूखी हवाओं का प्रभाव बढ़ता है, आसमान साफ होने लगता है और बारिश की गतिविधियां धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं। इसी प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग क्षेत्रों से मानसून की वापसी का ऐलान किया जाता है।

 

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