कीर्ति चक्र लेते ही छलक पड़ा मां का दर्द, राष्ट्रपति से लिपटकर रोईं शहीद की मां; भावुक क्षण ने सबकी आंखें कर दीं नम

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नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में आयोजित वीरता सम्मान समारोह के दौरान एक ऐसा भावुक दृश्य सामने आया जिसने पूरे देश को भावुक कर दिया। शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। सम्मान ग्रहण करने पहुंचीं उनकी मां बेटे की याद में खुद को संभाल नहीं सकीं और उनकी आंखों से आंसू बह निकले। इसी दौरान राष्ट्रपति स्वयं उनके पास पहुंचीं और उन्हें सम्मान प्रदान किया। यह पल वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए बेहद भावुक और यादगार बन गया।

शौर्य और सर्वोच्च बलिदान को मिला देश का बड़ा सम्मान

राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। देश की रक्षा के लिए दिखाई गई उनकी असाधारण वीरता, अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को राष्ट्र ने इस सम्मान के माध्यम से नमन किया। समारोह में मौजूद लोगों ने वीर सपूत के साहस और कर्तव्यनिष्ठा को श्रद्धापूर्वक याद किया।

मां के आंसू देखकर भावुक हुआ पूरा समारोह

समारोह का सबसे मार्मिक क्षण उस समय सामने आया जब शहीद की मां नीता तिवारी सम्मान ग्रहण करने के लिए मंच पर पहुंचीं। बेटे की शहादत को याद करते हुए वह भावुक हो गईं और राष्ट्रपति से लिपटकर रो पड़ीं। एक मां के दर्द और बेटे के बलिदान का यह दृश्य देखकर पूरा सभागार कुछ पल के लिए भावनाओं में डूब गया। राष्ट्रपति ने भी संवेदनशीलता दिखाते हुए स्वयं आगे बढ़कर शहीद के माता-पिता को कीर्ति चक्र प्रदान किया।

प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री भी दिखे भावुक

शहीद के माता-पिता की पीड़ा और गर्व से भरे इस क्षण ने समारोह में मौजूद सभी लोगों को भावुक कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी हाथ जोड़कर सम्मान व्यक्त करते नजर आए। सभागार में मौजूद अनेक लोगों की आंखें नम हो गईं और वातावरण पूरी तरह भावनात्मक हो उठा।

साथी सैनिक की जान बचाते हुए हुए थे शहीद

लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी, जो सिक्किम स्काउट्स का हिस्सा थे, 22 मई 2025 को उत्तर सिक्किम में एक ऑपरेशनल गश्त के दौरान शहीद हो गए थे। बताया जाता है कि उन्होंने अपने साथी सैनिक अग्निवीर स्टीफन सुब्बा की जान बचाने के प्रयास में सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनका साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

राष्ट्रपति भवन का यह दृश्य बना राष्ट्र की भावनाओं का प्रतीक

सम्मान समारोह का यह भावुक पल केवल एक पुरस्कार वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे देश को उन सैनिकों और उनके परिवारों के त्याग की याद दिलाई, जो राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं। शहीद लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी की वीरता और उनके परिवार का साहस देशवासियों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बना हुआ है।

 

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