हाथों ने छोड़ा साथ, तो मुंह से थामी कलम! 10वीं बोर्ड में 93.8% अंक लाकर फैजान ने रचा प्रेरणा का नया अध्याय

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गोड्डा: कठिन परिस्थितियां अक्सर लोगों के हौसलों की परीक्षा लेती हैं, लेकिन कुछ लोग अपने जज्बे से हर चुनौती को मात देकर नई मिसाल कायम कर देते हैं। झारखंड के गोड्डा जिले के रहने वाले मोहम्मद फैजान उल्लाह ने ऐसा ही कर दिखाया है। सेरेब्रल पाल्सी जैसी गंभीर शारीरिक चुनौती के बावजूद उन्होंने झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 93.8 प्रतिशत अंक हासिल कर सबको प्रेरित किया है।

फैजान की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है। उनकी सफलता की चर्चा अब एक प्रेरणादायक उदाहरण के रूप में की जा रही है।

मुंह से लिखकर हासिल की बड़ी सफलता

बीमारी के कारण जब उनके हाथों ने काम करना लगभग बंद कर दिया, तब भी फैजान ने हार नहीं मानी। उन्होंने मुंह से कलम पकड़कर पढ़ाई जारी रखी और लगातार मेहनत के दम पर बोर्ड परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया।

उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि सफलता केवल शारीरिक क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम ही असली ताकत होते हैं।

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने की मुलाकात

फैजान की सफलता से प्रभावित होकर झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने छात्र के संघर्ष, मेहनत और अदम्य साहस की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने वाला व्यक्ति ही वास्तविक सफलता हासिल करता है और फैजान ने अपने प्रदर्शन से यह साबित कर दिया है।

पूरे देश के युवाओं के लिए बने प्रेरणा

दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि फैजान की कहानी केवल गोड्डा या झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने विश्वास जताया कि अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर फैजान भविष्य में और बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती और फैजान इसका जीवंत उदाहरण हैं।

शिक्षा में नहीं आने दी जाएगी आर्थिक बाधा

मुलाकात के दौरान मंत्री ने फैजान को भरोसा दिलाया कि उनकी आगे की पढ़ाई और उच्च शिक्षा में आर्थिक संसाधनों की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी। सरकार और समाज की ओर से उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

फैजान की सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और हौसले मजबूत हों, तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सफलता हासिल की जा सकती है।

 

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