ओखला पक्षी अभयारण्य में दिखा दुर्लभ विदेशी मेहमान, 17 साल बाद फिर नजर आया व्हाइट स्टॉर्क? पक्षी प्रेमियों में उत्साह
गौतमबुद्धनगर: ओखला पक्षी अभयारण्य में दुर्लभ प्रवासी पक्षी व्हाइट स्टॉर्क (सफेद सारस) नजर आने से दिल्ली-एनसीआर के पक्षी प्रेमियों और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह है। इस भव्य पक्षी को पहली बार 1 नवंबर को डॉ. तेजस्वी ने देखा था। इसके बाद लगातार तीन दिनों तक इसकी मौजूदगी दर्ज की गई। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में पक्षी विज्ञानी, वन्यजीव फोटोग्राफर और प्रकृति प्रेमी अभयारण्य पहुंच रहे हैं।
मध्य एशिया की दुर्लभ उप-प्रजाति होने की संभावना
पक्षी विज्ञानी विशेषज्ञों के अनुसार, ओखला में दिखाई दिया व्हाइट स्टॉर्क संभवतः इसकी दुर्लभ मध्य एशियाई उप-प्रजाति सिकोनिया सिकोनिया एशियाटिका (Ciconia ciconia asiatica) है। इसकी आबादी बेहद छोटी और सीमित मानी जाती है। यह मुख्य रूप से उज्बेकिस्तान के कुछ हिस्सों और कजाखस्तान के सुदूर दक्षिणी क्षेत्रों में प्रजनन करती है।
इस उप-प्रजाति का प्रवासन मार्ग आमतौर पर ईरान से होते हुए भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुंचता है। यहां यह सर्दियों के मौसम में अनुकूल ठिकानों की तलाश करती है। ऐसे में उत्तरी भारत में इसकी मौजूदगी को पक्षी विज्ञानी एक असाधारण घटना मान रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर में पहले भी दर्ज हुए हैं छिटपुट रिकॉर्ड
ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक, व्हाइट स्टॉर्क दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में बेहद दुर्लभ पक्षी रहा है। इससे पहले मार्च 1992 और फरवरी 2005 में ओखला में इसे देखा गया था। इसके अलावा 2004-05 के मध्य शीतकाल में पलवल और मार्च 2019 में जेवर के पास भी इसकी मौजूदगी दर्ज की गई थी।
यमुना के आर्द्रभूमि क्षेत्रों में इस दुर्लभ मध्य एशियाई प्रवासी पक्षी का दिखना ओखला पक्षी अभयारण्य के पारिस्थितिक महत्व को भी रेखांकित करता है। यह अभयारण्य प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण ठिकाना माना जाता है।
DFO बोले- आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है यह आगमन
प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) रजनीकांत मित्तल ने इस दुर्लभ पक्षी के आगमन पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि ओखला पक्षी अभयारण्य में व्हाइट स्टॉर्क का दिखना यहां के समृद्ध आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमाण है। वन विभाग आवास प्रबंधन और संरक्षण के प्रयासों के जरिए प्रवासी मार्गों पर स्थानीय प्रजातियों के साथ दुर्लभ प्रवासी पक्षियों को भी सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने प्रकृति प्रेमियों से अभयारण्य की शांति और प्राकृतिक वातावरण का सम्मान करते हुए इस दुर्लभ पक्षी को देखने की अपील की।
पक्षी प्रेमियों ने बताया यादगार अनुभव
प्रकृतिविद् और वन्यजीव फोटोग्राफर निखिल देवसर ने कहा कि एनसीआर में व्हाइट स्टॉर्क को देखना किसी भी पक्षी विज्ञानी के लिए रोमांचक अनुभव है। खासकर अगर यह दुर्लभ मध्य एशियाई एशियाटिका उप-प्रजाति है, तो इसका महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में इसे ऐतिहासिक रूप से अनियमित और दुर्लभ शीतकालीन प्रवासी माना जाता रहा है।
वहीं, पक्षी प्रेमी रोहित शर्मा ने कहा कि पिछले तीन दिनों से ओखला का माहौल उत्साह से भरा हुआ है। शहरी अभयारण्य में इतने दुर्लभ पक्षी को करीब से देखना संरक्षित आर्द्रभूमियों के महत्व को समझने का अवसर है। ऐसे अनुभव लोगों का प्रकृति से जुड़ाव बढ़ाते हैं और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं।
वन विभाग ने पक्षियों को परेशान न करने की अपील की
वन विभाग इस मौसम में व्हाइट स्टॉर्क समेत अन्य सर्दियों के प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी पर नजर रख रहा है। विभाग का प्रयास है कि अभयारण्य में पक्षियों के लिए शांत और बाधा-मुक्त वातावरण बना रहे। पक्षी प्रेमियों और पर्यटकों से जिम्मेदारी के साथ अभयारण्य घूमने तथा पक्षियों की शांति में खलल न डालने की अपील की गई है।