आंतों का यह आम बैक्टीरिया बढ़ा सकता है कोलन कैंसर का खतरा, 20 साल पुरानी गुत्थी सुलझाने में वैज्ञानिकों को मिली कामयाबी

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नई दिल्ली: आंतों में मौजूद कुछ बैक्टीरिया सेहत के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसे ही बैक्टीरिया और कोलन कैंसर के बीच संबंध को समझने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि बैक्टेराइड्स फ्रैजिलिस नामक बैक्टीरिया की कुछ किस्मों से निकलने वाला विष आंतों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे सूजन और ट्यूमर बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है।

करीब 20 साल से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि इस बैक्टीरिया का विष आंतों की कोशिकाओं पर किस तरह असर डालता है। नेचर जर्नल में प्रकाशित नए अध्ययन ने इस प्रक्रिया की एक अहम कड़ी स्पष्ट की है।

क्लाडिन-4 प्रोटीन से जुड़कर हमला करता है बैक्टीरिया का विष

बैक्टेराइड्स फ्रैजिलिस की कुछ किस्में बीएफटी यानी बैक्टेराइड्स फ्रैजिलिस टॉक्सिन नामक विष पैदा करती हैं। यह विष आंतों की सुरक्षा परत को कमजोर कर सकता है। इसके कारण लंबे समय तक सूजन बनी रहने और कैंसर से जुड़ी प्रक्रियाओं को बढ़ावा मिलने की आशंका होती है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि यह विष सबसे पहले क्लाडिन-4 नामक प्रोटीन से जुड़ता है। यह प्रोटीन आंतों की कोशिकाओं के बीच मजबूत संपर्क बनाए रखने में मदद करता है। साथ ही यह आंतों की सुरक्षा परत को व्यवस्थित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सीआरआइएसपीआर तकनीक से सुलझी पुरानी गुत्थी

इस प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने सीआरआइएसपीआर जीन-संपादन तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके जरिए आंतों की कोशिकाओं में अलग-अलग जीन को निष्क्रिय किया गया, ताकि पता लगाया जा सके कि बैक्टीरिया के विष को कोशिकाओं से जुड़ने के लिए किस प्रोटीन की जरूरत होती है।

इस जांच में क्लाडिन-4 की अहम भूमिका सामने आई। शोधकर्ताओं ने पाया कि जब इससे जुड़े जीन को निष्क्रिय कर दिया गया, तो विष कोशिकाओं से जुड़ने में असफल रहा। इसके बाद वह ई-कैडेरिन नामक प्रोटीन को भी नुकसान नहीं पहुंचा सका। ई-कैडेरिन कोशिकाओं को आपस में जोड़े रखने में मदद करता है।

नई जांच और इलाज की संभावनाएं खुलीं

अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की वैज्ञानिक सिंथिया सियर्स के मुताबिक, बैक्टीरिया के विष के काम करने के तरीके को समझने से नई जांच और उपचार पद्धतियां विकसित करने का रास्ता खुल सकता है।

शोधकर्ता अब ऐसे छोटे अणुओं और जैविक उपचारों पर काम कर रहे हैं, जो इस विष को आंतों की कोशिकाओं से जुड़ने से रोक सकें। हालांकि, इसके लिए दोनों अणुओं की सटीक त्रि-आयामी संरचना को समझना भी जरूरी होगा।

चूहों पर प्रयोग में मिला बचाव का संकेत

शोधकर्ताओं ने इस खोज के आधार पर एक खास प्रोटीन से बना ‘मॉलिक्यूलर डिकॉय’ तैयार किया। यह एक नकली लक्ष्य की तरह काम करता है और बैक्टीरिया के विष को आंतों की कोशिकाओं तक पहुंचने से पहले ही अपने साथ बांध लेता है।

चूहों पर किए गए प्रयोगों में इस तरीके से विष के कारण होने वाले नुकसान से बचाव देखने को मिला। हालांकि, अभी यह साबित नहीं हुआ है कि यह तरीका इंसानों में कोलन कैंसर को रोकने में कारगर होगा। इसके लिए आगे और शोध तथा मानव परीक्षणों की जरूरत है।

बैक्टीरिया की मौजूदगी का मतलब कैंसर होना नहीं

गौरतलब है कि वर्ष 2009 में हुए एक अध्ययन में भी बैक्टेराइड्स फ्रैजिलिस के विष और कोलन ट्यूमर के बीच संबंध सामने आया था। नई खोज ने इस संबंध के पीछे काम करने वाली प्रक्रिया को समझने में मदद की है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह बैक्टीरिया स्वस्थ लोगों की आंतों में भी पाया जा सकता है। इसलिए इसकी मौजूदगी का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को कोलन कैंसर जरूर होगा। शोध का उद्देश्य यह समझना है कि बैक्टीरिया की विष पैदा करने वाली कुछ किस्में आंतों की कोशिकाओं को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं।

 

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