भारत-कनाडा के कारोबारी रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार? IDBI बैंक के ₹52,878 करोड़ के सौदे से निवेश के खुलेंगे रास्ते
भारत में अब तक 107 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है कनाडा
कनाडा के मंत्री मनिंदर सिद्धू के मुताबिक, उनका देश भारत में अब तक करीब 107 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश कर चुका है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कनाडाई कंपनियां, संस्थान और पेंशन फंड भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में योगदान दे रहे हैं।
सिद्धू ने फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स और उसके प्रमुख प्रेम वत्स की भूमिका का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, कंपनी भारत में हवाई अड्डों के विकास से जुड़ी गतिविधियों में योगदान दे रही है। भारत की विकास योजनाएं कनाडाई निवेशकों के लिए आगे भी नए अवसर पैदा कर सकती हैं।
आईडीबीआई बैंक के सौदे में क्या है खास?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को आईडीबीआई बैंक की रणनीतिक बिक्री और पुनर्गठन को मंजूरी दी। प्रस्तावित सौदे का मूल्य 52,878 करोड़ रुपये है। इसके तहत केंद्र सरकार अपनी 30.48 प्रतिशत और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अपनी 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचेंगे।
इस प्रक्रिया के बाद सरकार की हिस्सेदारी घटकर 15 प्रतिशत और एलआईसी की हिस्सेदारी 19 प्रतिशत रह जाएगी। बैंक में 60.72 प्रतिशत नियंत्रक हिस्सेदारी के प्रस्तावित हस्तांतरण में कनाडा की फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भूमिका अहम है। इस सौदे को बैंकिंग क्षेत्र में सरकारी हिस्सेदारी घटाने और निजी निवेश की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निर्मला सीतारमण ने बताया बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक पुनर्गठन की मंजूरी का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे बैंक को विकास के अगले चरण में आगे बढ़ने और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करने में मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से बैंकिंग व्यवस्था मजबूत होगी और सेवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने में सहायता मिलेगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी कहा कि इस फैसले से वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए नए अवसर तैयार होने की संभावना है।
आईडीबीआई बैंक की वित्तीय स्थिति में कितना सुधार हुआ?
आईडीबीआई बैंक के वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में उसकी परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। सितंबर 2018 में बैंक का सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 31.78 प्रतिशत था, जो मार्च 2026 में घटकर 2.32 प्रतिशत रह गया। इसी अवधि में शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात 17.30 प्रतिशत से घटकर 0.15 प्रतिशत पर आ गया।
वित्त वर्ष 2025-26 में बैंक ने 9,513 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। इससे पहले खराब वित्तीय स्थिति के चलते भारतीय रिजर्व बैंक ने मई 2017 में बैंक को त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई यानी पीसीए के दायरे में रखा था। वित्तीय स्थिति में सुधार के बाद मार्च 2021 में बैंक को इस व्यवस्था से बाहर कर दिया गया।
विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों में निवेश बढ़ाने की तैयारी
मनिंदर सिद्धू ने भारत में बुनियादी ढांचे, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े क्षेत्रों को कनाडाई निवेश के लिए संभावनाओं वाला बताया। उन्होंने भारत की विमानन और परिवहन संबंधी विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि देश 100 अतिरिक्त हवाई अड्डे बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसके अलावा भारत को करीब 2,000 और विमानों की जरूरत होगी।
सिद्धू के मुताबिक, कनाडा के विमानन उद्योग का अनुभव, बुनियादी ढांचा विकसित करने की विशेषज्ञता और ऊर्जा क्षेत्र की क्षमता भारत की जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी हो सकती है। इन क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच कारोबारी सहयोग बढ़ने की संभावनाएं हैं।
कनाडाई पेंशन फंड भारत की परियोजनाओं में लगा रहे पूंजी
कनाडा के मंत्री ने बताया कि उनके देश के पेंशन फंड भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं। इनमें राजमार्गों से जुड़ी परियोजनाएं भी शामिल हैं। पेंशन फंड आम तौर पर लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देते हैं, जिससे बड़ी विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने में मदद मिल सकती है।
सिद्धू ने भारत और कनाडा की अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग की संभावनाओं पर जोर दिया। भारत में बुनियादी ढांचे के विस्तार की जरूरत और कनाडा की निवेश क्षमता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है।
क्या आईडीबीआई बैंक सौदे से भारत-कनाडा निवेश संबंधों को मिलेगा बढ़ावा?
आईडीबीआई बैंक का सौदा ऐसे समय सामने आया है, जब कनाडा भारत में अपने निवेश के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहा है। फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स की भागीदारी से बैंक के स्वामित्व में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही वित्तीय क्षेत्र में विदेशी निवेश और दोनों देशों के बीच कारोबारी सहयोग को लेकर भी चर्चा तेज हुई है।
हालांकि, इस सौदे के बाद भारत में कितना अतिरिक्त कनाडाई निवेश आएगा और इसके लिए क्या समयसीमा होगी, इस बारे में मनिंदर सिद्धू ने कोई निश्चित आंकड़ा नहीं दिया है। फिलहाल बुनियादी ढांचा, विमानन, ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज दोनों देशों के बीच संभावित निवेश सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बने हुए हैं।