लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब पराली, कृषि अवशेषों और कचरे से हवाई जहाज के लिए हरित ईंधन तैयार किया जाएगा। योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सतत विमानन ईंधन (एसएएफ) विनिर्माण प्रोत्साहन नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई है। इस नीति का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
कृषि अवशेषों से तैयार होगा विमानन ईंधन
नई नीति के तहत धान की भूसी, गेहूं का भूसा, गन्ने की खोई, तिलहन और कचरे का इस्तेमाल कर विमानन ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे कृषि अवशेषों के उपयोग के नए रास्ते खुलेंगे और किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकेंगे। साथ ही, विमानन क्षेत्र में पर्यावरण के अनुकूल ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जाएगा।
निवेश के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटी जाएंगी इकाइयां
नीति में पूंजी निवेश के आधार पर सतत विमानन ईंधन बनाने वाली इकाइयों को तीन श्रेणियों में रखा गया है। 200 करोड़ से 500 करोड़ रुपये तक का निवेश करने वाली इकाइयां वृहद श्रेणी में आएंगी। 500 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपये तक निवेश करने वाली इकाइयों को मेगा और 1,500 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली इकाइयों को अल्ट्रा मेगा श्रेणी में शामिल किया जाएगा।
इन इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए कई तरह की रियायतें देने का प्रावधान किया गया है। इनमें स्टांप शुल्क, भू-उपयोग परिवर्तन प्रभार और विकास शुल्क में छूट के साथ राज्य वस्तु एवं सेवा कर की प्रतिपूर्ति, ब्याज सब्सिडी और कौशल विकास अनुदान जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
निवेशकों को 10 साल तक बिजली शुल्क में पूरी छूट
नीति के तहत निवेशकों को 10 वर्षों तक बिजली शुल्क में 100 प्रतिशत छूट दी जाएगी। इसके अलावा, पेटेंट पंजीकरण शुल्क की प्रतिपूर्ति और जमीन आवंटित होने की स्थिति में शुरुआती भूमि सब्सिडी देने का भी प्रावधान है।
गन्ने की खेती और एथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश की अग्रणी स्थिति को देखते हुए राज्य में दूसरी पीढ़ी के जैव ईंधन और अल्कोहल से विमानन ईंधन बनाने वाली तकनीकों के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। नई नीति के जरिए इस क्षेत्र में निवेश और तकनीकी विकास को गति देने की कोशिश की जाएगी।
यूपीनेडा को सौंपी गई नीति लागू करने की जिम्मेदारी
नीति को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीनेडा) को नोडल एजेंसी बनाया गया है। निवेशकों से मिलने वाले आवेदनों का मूल्यांकन करने के लिए निदेशक स्तर पर समिति गठित की जाएगी। यह नीति पांच वर्षों तक या नई नीति लागू होने तक प्रभावी रहेगी।