यरुशलम: इजरायल में संसदीय चुनाव के नतीजों के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। देश के यरुशलम, तेल अवीव और हाइफा जैसे प्रमुख शहरों में सैकड़ों लोगों ने प्रदर्शन कर यहूदी और अरब समुदायों की भागीदारी वाली साझा सरकार बनाने की मांग उठाई। एक ओर संसद की 120 सीटों के लिए हुई वोटों की गिनती जारी है, वहीं दूसरी ओर इन प्रदर्शनों ने देश में नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।
‘सभी के लिए आजादी’ के नारों से गूंजे शहर
स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 300 लोग यरुशलम के पेरिस स्क्वायर, तेल अवीव के मेसिला पार्क और हाइफा के यूनेस्को स्क्वायर पर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर ‘नदी से समुद्र तक सभी की आजादी’ और ‘यहूदी-अरब सरकार के लिए हां’ जैसे नारे लिखे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि देश में जारी राजनीतिक अनिश्चितता और सामाजिक भेदभाव को दूर करने के लिए ऐसी सरकार की जरूरत है, जिसमें यहूदी और अरब दोनों समुदायों को प्रतिनिधित्व मिले।
चुनाव में नेतन्याहू गठबंधन को झटका, विपक्ष आगे
केंद्रीय चुनाव समिति के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, करीब 97.5 प्रतिशत मतदान केंद्रों से संबंधित 90 प्रतिशत मतों की गिनती पूरी हो चुकी है। शुरुआती रुझानों में बेंजामिन नेतन्याहू के समर्थक गठबंधन को 53 सीटें मिलती दिखाई दे रही हैं, जबकि विरोधी गठबंधन 67 सीटों पर आगे है। विपक्षी खेमे में यहूदी नेतृत्व वाली पार्टियों के खाते में 48 सीटें और अरब नेतृत्व वाली पार्टियों के खाते में 19 सीटें जाती दिख रही हैं।
विपक्षी गठबंधन बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंचता नजर आ रहा है, लेकिन सरकार बनाने की राह में आंतरिक मतभेद बड़ी बाधा बने हुए हैं। यहूदी नेतृत्व वाले विपक्षी दलों में से ज्यादातर अरब पार्टियों के साथ गठबंधन करने को लेकर हिचकिचा रहे हैं। वहीं, चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, सैन्यकर्मियों और विशेष लिफाफों में डाले गए मतों की गिनती अभी अंतिम चरण में होगी। ऐसे में सीटों के अंतिम आंकड़ों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
गादी आइजेनकोट ने नेतन्याहू सरकार पर साधा निशाना
चुनावी रुझानों पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष के प्रमुख नेता और ‘यंशार’ पार्टी के अध्यक्ष गादी आइजेनकोट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनावी जनादेश नेतन्याहू सरकार और सैन्य भर्ती से बचने वालों के प्रति स्पष्ट अविश्वास को दर्शाता है।
आइजेनकोट ने माना कि फिलहाल उनके पक्ष में स्पष्ट संसदीय बहुमत दिखाई नहीं दे रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि देश में बदलाव लाने और एक नई जायोनी सरकार स्थापित करने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
यायर गोलान ने अरब पार्टियों को साथ लाने के दिए संकेत
वामपंथी गुट ‘द डेमोक्रेट्स’ के अध्यक्ष यायर गोलान ने भी चुनाव के बाद नए राजनीतिक समीकरण बनाने की संभावना जताई है। गोलान उन चुनिंदा विपक्षी नेताओं में शामिल हैं, जो खुलकर अरब पार्टियों को सरकार में शामिल करने की वकालत कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि विपक्षी नेताओं को एकजुट करने के लिए बैठकें की जा रही हैं, ताकि देश के युवाओं में भविष्य को लेकर भरोसा पैदा किया जा सके। गोलान के मुताबिक, युवा पीढ़ी के मन में अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या वे इस देश में रहना भी चाहते हैं। ऐसे में विपक्ष के सामने न केवल सरकार बनाने की चुनौती है, बल्कि लोगों का भरोसा बहाल करना भी अहम मुद्दा बन गया है।