प्रेग्नेंसी में कमर दर्द को समझें हल्के में नहीं, फिजियोथेरेपी से मिल सकती है राहत; जानें कब होती है जरूरत

0 23

नई दिल्ली: गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं और कमर दर्द इनमें सबसे आम समस्या मानी जाती है। जैसे-जैसे गर्भ में शिशु का विकास होता है, कमर के निचले हिस्से पर वजन और दबाव बढ़ने लगता है। इसके कारण शरीर का संतुलन बदल सकता है और मांसपेशियों, जोड़ों व लिगामेंट्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

गर्भावस्था के दौरान हार्मोन में बदलाव के कारण लिगामेंट्स अधिक लचीले हो जाते हैं, जिससे पेल्विस और रीढ़ की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सही देखभाल और विशेषज्ञ की सलाह से कमर दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रेग्नेंसी में कमर दर्द के पीछे ये कारण जिम्मेदार

गर्भावस्था में कमर दर्द का सबसे बड़ा कारण बढ़ता हुआ वजन और कमर के निचले हिस्से पर पड़ने वाला दबाव होता है। इसके अलावा शारीरिक गतिविधि की कमी, लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना, गलत तरीके से सोना और मांसपेशियों की कमजोरी भी दर्द को बढ़ा सकती है।

शरीर में होने वाले बदलावों के कारण कई महिलाओं को उठने-बैठने, चलने या लंबे समय तक खड़े रहने में भी परेशानी महसूस हो सकती है।

कमर दर्द में फिजियोथेरेपी कैसे करती है मदद

प्रेग्नेंसी के दौरान कमर दर्द को कम करने में फिजियोथेरेपी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिजियोथेरेपिस्ट सबसे पहले महिला के पोश्चर, चलने-फिरने के तरीके, मांसपेशियों की ताकत और दर्द की स्थिति को समझते हैं।

इसके बाद गर्भावस्था के महीने और महिला की जरूरत के अनुसार विशेष एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है। इसका उद्देश्य सिर्फ दर्द कम करना नहीं होता, बल्कि शरीर को मजबूत बनाना, संतुलन बेहतर करना और गर्भावस्था को अधिक आरामदायक बनाना भी होता है।

फिजियोथेरेपी में पेल्विक एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग, मोबिलिटी एक्सरसाइज, पेट के निचले हिस्से की मांसपेशियों से जुड़ी एक्सरसाइज और हिप व पेल्विक फ्लोर मसल्स को मजबूत करने वाली गतिविधियां शामिल हो सकती हैं।

उठने-बैठने के सही तरीके से भी कम हो सकता है दर्द

फिजियोथेरेपिस्ट गर्भवती महिलाओं को बैठने, खड़े होने, झुकने, सामान उठाने और बिस्तर से उठने के सही तरीके भी बताते हैं। इन छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करने से कमर के निचले हिस्से पर दबाव कम किया जा सकता है।

कुछ मामलों में मैनुअल थेरेपी का भी इस्तेमाल किया जाता है, जिससे मांसपेशियों की जकड़न कम करने और जोड़ों की गतिविधि बेहतर करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की थेरेपी या एक्सरसाइज प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह से ही करनी चाहिए।

गर्भावस्था के हर चरण में बदल सकती है फिजियोथेरेपी

प्रेग्नेंसी के महीने बढ़ने के साथ शरीर की जरूरतें भी बदलती रहती हैं। इसी के अनुसार फिजियोथेरेपी के तरीके और एक्सरसाइज में बदलाव किया जाता है।

विशेषज्ञ महिलाओं को सोने और आराम करने की सही स्थिति, रोजमर्रा के काम करने के तरीके और लंबे समय तक बैठने के दौरान सावधानियों के बारे में भी जानकारी देते हैं, ताकि कमर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

इन लक्षणों में तुरंत डॉक्टर से लें सलाह

गर्भावस्था में हर तरह के कमर दर्द को सामान्य नहीं माना जाना चाहिए। अगर दर्द अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए या इसके साथ योनि से खून आना, बुखार, पेशाब के दौरान दर्द, पैरों में कमजोरी या मांसपेशियों से जुड़ी परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

दवाओं के मुकाबले सही तरीके से की गई फिजियोथेरेपी गर्भावस्था के दौरान कमर दर्द से राहत पाने का सुरक्षित विकल्प हो सकती है। विशेषज्ञ की निगरानी और उचित देखभाल से इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

नोट: अगर आपको यह खबर पसंद आई तो इसे शेयर करना न भूलें, देश-विदेश से जुड़ी ताजा अपडेट पाने के लिए कृपया Vnation के Facebook पेज को LikeTwitter पर Follow करना न भूलें...
Leave A Reply

Your email address will not be published.