राहुल गांधी और अभिजीत दीपके के आंदोलन से कैसे निपटेगी BJP? NDA ने बनाया खास प्लान, जनता के भरोसे पर नजर

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नई दिल्ली: एसआईआर के मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन के बीच भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। दिल्ली में पिछले तीन दिनों से INDIA गठबंधन के नेता लगातार सक्रिय हैं, वहीं कॉकरोच जनता पार्टी ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। ऐसे में भाजपा विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के साथ जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। पार्टी की रणनीति केवल दिल्ली में जारी राजनीतिक टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के जरिए संभावित नकारात्मक माहौल को रोकने की भी कोशिश है।

विपक्ष के प्रदर्शन के बीच जनता के भरोसे पर BJP का फोकस

एसआईआर के मुद्दे पर विपक्ष लगातार सरकार और चुनाव आयोग को निशाने पर ले रहा है। संसद के मानसून सत्र के बाद से ही अलग-अलग मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश जारी है। इससे पहले छात्र आंदोलन और जेन-जी की नाराजगी के बीच सरकार ने आंदोलनकारियों की मांगें मानकर विवाद को शांत करने की दिशा में कदम उठाए थे।

सत्तारूढ़ खेमे का मानना है कि विपक्ष इन घटनाक्रमों के जरिए सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। अब चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विरोध के बीच भाजपा ने अपने प्रवक्ताओं और प्रमुख नेताओं को विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के लिए आगे किया है। पार्टी की कोशिश है कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता के बीच सरकार की छवि प्रभावित न हो।

NDA की एकजुटता पर असर नहीं पड़ने देने की तैयारी

भाजपा के एक महासचिव के मुताबिक, विपक्ष को प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार हमले करना लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। उनका दावा है कि विपक्ष सरकार को भी विवाद में घसीटकर नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसे जनता का समर्थन नहीं मिलेगा।

भाजपा का यह भी कहना है कि इन प्रदर्शनों से एनडीए की एकजुटता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एनडीए नेता चिराग पासवान ने भी कहा है कि अगर विपक्ष को अब भी कोई संदेह है, तो उसे चुनाव आयोग से सीधे बातचीत करनी चाहिए।

क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों के जरिए जवाब देने की रणनीति

भाजपा ने विरोध-प्रदर्शनों के बीच अपने संगठनात्मक कार्यक्रमों को जारी रखा है। पार्टी सेवा संकल्प अभियान के जरिए आम लोगों, खासकर युवाओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है।

इसके साथ ही पार्टी क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटी है। रणनीति यह है कि विपक्ष के आंदोलनों के कारण सरकार के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनने की आशंका को संगठनात्मक गतिविधियों और जनसंपर्क के जरिए कम किया जाए। भाजपा का ध्यान राजनीतिक विरोध का जवाब देने के साथ जमीनी स्तर पर अपनी मौजूदगी बनाए रखने पर भी है।

भाजपा ने विपक्ष पर लगाया दिल्ली में अव्यवस्था फैलाने का आरोप

विपक्ष के विरोध-प्रदर्शनों के बीच भाजपा ने गुरुवार को तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस कीं। इस दौरान सिद्धार्थ यादव ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरें सामान्य प्रदर्शन के बजाय राष्ट्रीय राजधानी में अराजकता की स्थिति दिखाती हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इन प्रदर्शनों में आम नागरिकों की भागीदारी नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर सड़क पर हो रहे प्रदर्शनों के जरिए देश में नेपाल और बांग्लादेश जैसी अराजकता फैलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। पार्टी ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित कर रही महिला पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की भी निंदा की।

अभिजीत दीपके और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर भी नजर

दिल्ली में विपक्षी गठबंधन के विरोध-प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान भी राजनीतिक घटनाक्रम को अहम बना रहा है। एक ओर कांग्रेस समेत विपक्षी दल एसआईआर के मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग को घेर रहे हैं, वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल अपने कार्यक्रमों तथा जनसंपर्क अभियानों को जारी रखकर राजनीतिक चुनौती का जवाब देने में जुटे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपक्ष के प्रदर्शनों का राजनीतिक असर कितना पड़ता है और भाजपा की संगठनात्मक गतिविधियां तथा सामाजिक-क्षेत्रीय समीकरणों पर जोर उसकी रणनीति को कितना मजबूत बनाते हैं।

 

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