17 साल निर्वासन, मौत की सजा और फिर सत्ता की दहलीज: कौन हैं तारिक रहमान जो बन सकते हैं बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री

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ढाका की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। बांग्लादेश में हालिया संसदीय चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन लगभग तय माना जा रहा है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। 12 फरवरी को हुए 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की भारी जीत के साथ देश की राजनीति में नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।

राजनीतिक विरासत से निकले नेता
तारिक रहमान का जन्म 20 नवंबर 1965 को ढाका में हुआ। वह पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया और पूर्व राष्ट्रपति जिया-उर-रहमान के बेटे हैं। परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण उनकी दिलचस्पी बचपन से ही राजनीति में रही और 1990 के दशक में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी। 1991 में अपनी मां को प्रधानमंत्री बनाने की रणनीति में उनका अहम योगदान माना जाता है।

मां की सत्ता वापसी के साथ बढ़ा प्रभाव
2001 में जब खालिदा जिया तीसरी बार सत्ता में आईं तो तारिक पार्टी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने लगे। ढाका का ‘हवा भवन’ उनके राजनीतिक संचालन का केंद्र माना जाता था। इसी दौर में उन पर भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे। विपक्षी अवामी लीग ने उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ तक कहना शुरू कर दिया, जिससे उनकी छवि विवादों में घिर गई।

गिरफ्तारी, मुकदमे और निर्वासन की कहानी
2006-07 की राजनीतिक अस्थिरता के बीच सैन्य समर्थित अंतरिम सरकार ने भ्रष्टाचार विरोधी अभियान चलाया और मार्च 2007 में तारिक को अचानक गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर कुल 84 मामले दर्ज हुए, जिनमें घोटाले, मनी लॉन्ड्रिंग और 2004 के ग्रेनेड हमले तक के आरोप शामिल थे। पार्टी लगातार दावा करती रही कि ये कार्रवाई राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी शेख हसीना की साजिश थी। जेल में कथित यातनाओं के दौरान उनकी रीढ़ की हड्डी क्षतिग्रस्त होने की बात भी सामने आई। सितंबर 2008 में जमानत मिलने के बाद वह पत्नी और बेटी के साथ इलाज के बहाने लंदन चले गए और फिर 17 वर्षों तक वहीं से पार्टी का नेतृत्व करते रहे।

मौत की सजा से लेकर राजनीतिक वापसी तक
शेख हसीना के 15 साल के शासनकाल में एक मामले में उन्हें मौत की सजा भी सुनाई गई, लेकिन उन्होंने देश वापसी नहीं की। अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद राजनीतिक हालात बदले और अंतरिम सरकार बनी, जिसकी कमान मुहम्मद यूनुस को सौंपी गई। इसी दौर में अदालतों ने उनके खिलाफ सभी मुकदमे खारिज कर दिए। दिसंबर 2025 में उन्होंने स्वदेश लौटने की घोषणा की और 25 दिसंबर को ढाका एयरपोर्ट पर लाखों समर्थकों ने उनका स्वागत किया।

वापसी के बाद सीधे सत्ता की दहलीज
देश लौटने के कुछ ही दिनों बाद उनकी मां खालिदा जिया का निधन हो गया। इसके बावजूद तारिक ने सिर्फ 50 दिन में चुनावी मैदान में उतरकर ढाका-17 और बोगरा-6 सीटों से जीत दर्ज की। अब पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद उन्होंने स्वच्छ राजनीति, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, युवाओं को रोजगार और लोकतंत्र की बहाली का वादा किया है। 60 वर्षीय तारिक को राजनीतिक हलकों में अपेक्षाकृत शांत और संयमित स्वभाव का नेता माना जाता है।

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