नोएडा। ओवरफ्लो होता सीवर, बजबजाती नालियां, संकरी गलियों में जमा गंदा पानी और जगह-जगह फैला कचरा—नोएडा के कई शहरी गांवों की यही पहचान बन चुकी है। अब इस बदहाल तस्वीर को बदलने की दिशा में नोएडा प्राधिकरण ने ठोस कदम उठाने का फैसला किया है। प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश के निर्देश पर शहर को बसाने में भूमि देने वाले 81 गांवों को मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है।
मॉडल विलेज के रूप में होगा 81 गांवों का विकास
नोएडा प्राधिकरण ने तय किया है कि सभी 81 शहरी गांवों के लिए अलग-अलग कार्ययोजना बनाकर सुनियोजित विकास का खाका खींचा जाएगा। इस योजना के तहत बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त करते हुए गांवों की तस्वीर बदली जाएगी। प्राधिकरण स्तर पर इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है और जल्द ही जमीनी स्तर पर काम शुरू होने की संभावना है।
नोएडा की वैश्विक पहचान, गांव भी होंगे उसी स्तर के
प्राधिकरण का मानना है कि नोएडा प्रदेश की शो विंडो है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी पहचान है। ऐसे में यहां के गांवों का साफ-सुथरा, सुंदर और आकर्षक होना जरूरी है। हर साल गांवों के विकास पर करीब 125 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। इसे देखते हुए अब चरणबद्ध तरीके से गांवों के विकास की रणनीति अपनाई जाएगी।
अनियोजित विकास बना सबसे बड़ी चुनौती
शहरी गांवों में अब तक अनियोजित विकास हुआ है। इसी वजह से यहां नई और बड़ी सीवर लाइन बिछाना संभव नहीं है। प्राधिकरण ने समाधान के तौर पर हर गांव में अलग सीवरेज पंपिंग स्टेशन (SPS) लगाने का फैसला किया है। इससे संकरी गलियों और सड़कों पर सीवर का पानी जमा नहीं होगा। संपवेल के जरिए सीवर को सीधे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) तक पहुंचाया जाएगा, जबकि मौजूदा सीवर लाइनों को दुरुस्त कर उपयोग में लाया जाएगा।
जलापूर्ति के लिए हर गांव का अलग यूजीआर
गांवों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हर गांव के लिए अलग भूमिगत जलाशय (UGR) बनाया जाएगा। इसे सेक्टरों और सोसायटी की जलापूर्ति से पूरी तरह अलग रखा जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि गांवों को पर्याप्त पानी मिल सके, खासकर तब जब भविष्य में सेक्टरों और सोसायटी में मीटर के आधार पर जल बिल वसूली की व्यवस्था लागू होगी। वहीं, सीवरेज सेवाओं पर 25 प्रतिशत शुल्क लेने का भी निर्णय लिया गया है।
पहले चरण में 15 से 17 सबसे बदहाल गांव
योजना के पहले चरण में 15 से 17 ऐसे गांवों को शामिल किया गया है, जिनकी स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। इनमें हरौला, भंगेल, झुंडपुरा, सोहरखा, सलारपुर, मामूरा, सदरपुर, गढ़ी शहदरा, अट्टा, नया बास, वाजितपुर, छलेरा, सर्फाबाद सहित अन्य गांव शामिल हैं।
नोएडा में जल और सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर की मौजूदा स्थिति
प्राधिकरण क्षेत्र में इस समय 107 यूजीआर हैं, जिनकी क्षमता 1500 से 7500 किलोलीटर के बीच है। इसके अलावा 52 ओवरहेड टैंक, 28 सीवरेज पंपिंग स्टेशन और 8 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट संचालित हैं। अभी गांव और उनसे जुड़े सेक्टरों को एक ही यूजीआर से जलापूर्ति होती है, जिससे कभी गांवों में पानी की कमी होती है तो कभी सेक्टरों में संकट खड़ा हो जाता है। यही दबाव सीवरलाइन ओवरफ्लो की बड़ी वजह बन रहा है।
सीईओ का स्पष्ट संदेश
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने स्पष्ट किया है कि गांवों का सुनियोजित और स्थायी विकास प्राधिकरण की प्राथमिकता है। मॉडल विलेज की अवधारणा के जरिए शहरी गांवों की दशा और दिशा दोनों बदली जाएंगी।