नोएडा। नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद योगी सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है और उन्हें वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। इस मामले में पहले ही एक जूनियर इंजीनियर को बर्खास्त किया जा चुका है, जबकि दो बिल्डरों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। 27 वर्षीय इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे सिस्टम की गंभीर लापरवाही सामने आती गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस मामले ने और तूल पकड़ लिया, जिसके बाद राज्य सरकार ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोले कई राज
युवराज मेहता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसकी मौत दम घुटने से हुई है। रिपोर्ट में हार्ट फेलियर या कार्डियक अरेस्ट को भी मौत का कारण बताया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि रिपोर्ट इस बात की पुष्टि करती है कि युवराज को कार्डियक अरेस्ट आया था, जिससे उसकी जान चली गई। यह दर्दनाक हादसा शनिवार रात का बताया जा रहा है, जब नोएडा में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। जिस बेसमेंट में युवराज की कार गिरी, वहां पानी भरा हुआ था और पानी अत्यधिक ठंडा बताया जा रहा है। हादसे के बाद युवराज लंबे समय तक उसी ठंडे पानी के बीच फंसा रहा।
दो घंटे तक मदद का करता रहा इंतजार
पुलिस जांच में सामने आया है कि युवराज लगभग दो घंटे तक पानी में फंसी अपनी कार पर खड़ा होकर मदद का इंतजार करता रहा। इस दौरान वह लगातार ठंड, मानसिक तनाव और डर की स्थिति में रहा। लंबे समय तक ठंडे पानी में भीगे रहने से उसकी हालत बिगड़ती चली गई।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अत्यधिक ठंड, लंबे समय तक पानी के संपर्क और मानसिक घबराहट की वजह से युवराज की तबीयत अचानक बिगड़ गई। आशंका जताई जा रही है कि मदद में देरी के कारण वह घबराहट का शिकार हो गया और इसी दौरान उसे कार्डियक अरेस्ट आ गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
इलाके में आक्रोश, सिस्टम पर उठे सवाल
युवराज मेहता की मौत के बाद इलाके में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। रविवार को भी सुबह से देर शाम तक घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जुटी रही। स्थानीय लोग और राहगीर रुक-रुक कर प्रशासन और सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते नजर आए। लोगों का कहना है कि युवराज करीब दो घंटे तक मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन समय रहते न तो सही संसाधन पहुंचे और न ही प्रभावी रेस्क्यू ऑपरेशन किया गया। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अगर समय पर समुचित कार्रवाई होती, तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी।
प्रशासन पर गिरी गाज, आगे भी हो सकती है कार्रवाई
नोएडा अथॉरिटी के सीईओ को हटाया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं करने के मूड में है। जांच के आधार पर आगे और अधिकारियों व जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।