नोएडा । 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। जलजमाव वाले गहरे गड्ढे में कार गिरने से हुई मौत के मामले में अब दूसरी FIR दर्ज की गई है। इस नई FIR में लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन और विजटाउन कंपनी से जुड़े पांच शेयरहोल्डर्स को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस का आरोप है कि कंपनियों की गंभीर लापरवाही और चेतावनियों की अनदेखी ने एक जानलेवा गड्ढे को जन्म दिया।
नॉलेज पार्क थाने में दर्ज दूसरी FIR में लापरवाही के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण अधिनियम के उल्लंघन की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। पुलिस का कहना है कि सीवेज और ड्रेनेज से जुड़े खतरों को नजरअंदाज किया गया, जिसके चलते यह हादसा हुआ।
कौन-कौन बनाए गए आरोपी
दूसरी FIR में जिन पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है, वे सभी लोटस ग्रीन और विजटाउन कंपनियों के शेयरहोल्डर और निदेशक बताए जा रहे हैं।
अभय कुमार
संजय कुमार
मनीष कुमार
अचल बोहरा
निर्मल कुमार
पहले से था खतरे का अंदेशा, फिर भी नहीं हुए इंतजाम
जांच में सामने आया है कि कंपनियों को इस खतरे की जानकारी पहले से थी। 14 मार्च 2022 को विजटाउन कंपनी की ओर से नोएडा प्राधिकरण को भेजे गए एक पत्र में साफ तौर पर लिखा गया था कि सीवर लाइन धंसने के कारण सड़कों के नीचे मिट्टी कट रही है और किसी बड़े हादसे की आशंका है। इसके बावजूद न तो सड़क की मरम्मत कराई गई और न ही कोई ठोस सुरक्षा इंतजाम किए गए।
SIT जांच में तेजी, अब तक क्या हुआ एक्शन
इस मामले में विजटाउन के निदेशक अभय कुमार को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। मेरठ जोन के ADG भानु भास्कर के नेतृत्व में गठित एसआईटी (SIT) लगातार जांच कर रही है। एसआईटी ने नोएडा प्राधिकरण के कई अधिकारियों से लंबी पूछताछ की है। 21 जनवरी को फॉरेंसिक टीम ने सेक्टर-150 स्थित घटनास्थल का निरीक्षण किया और उस तालाबनुमा गड्ढे की माप ली, जिसमें युवराज की जान गई थी।
नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर भी उठे सवाल
इस हादसे ने नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2023 में ही सेक्टर-150 में जलजमाव को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन बजट आवंटन के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बढ़ते जनआक्रोश के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण के सीईओ को पद से हटा दिया है, वहीं एक जूनियर ट्रैफिक इंजीनियर को बर्खास्त किया गया है।
क्या था पूरा हादसा
16 जनवरी को घने कोहरे के बीच गुरुग्राम में कार्यरत सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार नोएडा के सेक्टर-150 में जलभराव वाले गहरे गड्ढे में गिर गई थी। युवराज करीब दो घंटे तक मदद के लिए संघर्ष करते रहे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस की कोशिशों के बावजूद, पिता की आंखों के सामने युवराज की जान नहीं बचाई जा सकी।