77वें गणतंत्र दिवस पर मायावती का बड़ा संदेश, एसआईआर, धर्म परिवर्तन, महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार से आत्ममंथन की अपील
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश और दुनिया में रहने वाले सभी भारतीयों को शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से केवल वादों के बजाय जमीनी हकीकत का ईमानदार आकलन करने की अपील की और कहा कि यह परखना जरूरी है कि सरकारों की नीतियां लोगों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार ला पाई हैं या नहीं।
गणतंत्र दिवस पर आत्मचिंतन की जरूरत
बसपा द्वारा जारी प्रेस नोट में मायावती ने कहा कि गणतंत्र दिवस का असली महत्व बड़े-बड़े दावों और वादों से अलग हटकर यह देखने में है कि संविधान की सर्वसमाज हितैषी भावना के अनुरूप देश ने राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के क्षेत्र में कितना ठोस विकास किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज भी आम नागरिक के जीवन में वह बहुप्रतीक्षित बदलाव नजर आ रहा है, जिसकी परिकल्पना संविधान निर्माताओं ने की थी।
गरीबी और बेरोजगारी पर सरकारों से सवाल
मायावती ने कहा कि आजादी के बाद बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के मानवतावादी और कल्याणकारी संविधान के लागू होने के बावजूद लगभग 140 करोड़ की आबादी वाले देश में गरीबी और बेरोजगारी की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर क्यों कुछ मुट्ठीभर अमीर और धनाढ्य वर्ग समृद्ध होता जा रहा है, जबकि बहुजन समाज का बड़ा हिस्सा गरीब और बेरोजगार होकर सरकारी सहायता पर निर्भर होता जा रहा है। उन्होंने इसे केवल आंकलन नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का विषय बताया।
वैश्विक मंच पर भारत की नैतिक भूमिका पर चिंता
बसपा सुप्रीमो ने कहा कि भारत अपने संवैधानिक मूल्यों के कारण लंबे समय तक दुनिया में नैतिक शक्ति के रूप में जाना जाता रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या आज भी भारत वही भूमिका निभा पा रहा है, जहां दुनिया भारत से सीखती थी। तेजी से बदलते वैश्विक हालात के बीच भारतीय लोकतंत्र और संविधान का महत्व और बढ़ गया है, ऐसे में सरकारों को आत्मनिर्भर भारत के साथ-साथ लोगों की उम्मीदों को मजबूत करने वाले प्रयासों पर गंभीरता से काम करना चाहिए।
एसआईआर और वोटर लिस्ट को लेकर सुझाव
घुसपैठियों और गैर-नागरिकों के मुद्दे पर मायावती ने कहा कि उनकी पहचान कर उन्हें वोटर लिस्ट से अलग करना एक उचित और निरंतर प्रक्रिया है, लेकिन इसके लिए करीब 100 करोड़ भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों को सरकारी दस्तावेजों की जटिलताओं में उलझाना सही नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इसके लिए कोई सरल और बेहतर विकल्प तलाशा जाए।
धर्म परिवर्तन और विभाजनकारी राजनीति पर चिंता
मायावती ने कहा कि यदि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद धर्म परिवर्तन की घटनाएं नहीं रुक रही हैं, तो इसके मूल कारणों की पहचान कर आवश्यक सुधार किए जाने चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि धर्म परिवर्तन की आड़ में अगर विभाजनकारी राजनीति और हिंसा बढ़ती है, तो उस पर जितनी जल्दी रोक लगे, उतना ही देशहित में बेहतर होगा।
महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक असमानता पर फोकस
अपने संदेश के अंत में मायावती ने महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जातिवाद और सांप्रदायिकता का जिक्र करते हुए कहा कि इन वजहों से बहुजन समाज के लोगों के बीच सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक असमानता बढ़ रही है और जीवन स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि बसपा इस स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित है और सरकारों को इस पर ठोस ध्यान देना चाहिए। यही गणतंत्र दिवस के अवसर पर सभी का संकल्प होना चाहिए।