गणतंत्र दिवस की परेड में जम्मू-कश्मीर की झांकी को मिला दूसरा स्थान, लिविंग कैनवस थीम को बनाया था आधार
जम्मू। कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड 2026 में देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निकाली गई झांकियों में जम्मू कश्मीर की झांकी ने दूसरा स्थान अर्जित किया है। जम्मू कश्मीर की झांकी प्रदेश सदियों पुरानी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कलात्मक उत्कृष्टता को जीवंत बना रही थी। लिविंग कैनस के विषय को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई इस झांकी ने सभी को प्रभावित किया। यह झांकी जम्मू-कश्मीर की सदियों पुरानी कलाओं, हस्तशिल्प और लोक परंपराओं का जश्न मना रही थी।
झांकी ने शिल्प कौशल, प्रदर्शन और कहानी कहने का एक सहज मेल पेश किया, जो केंद्र शासित प्रदेश की हमेशा रहने वाली रचनात्मक भावना को दर्शाता है। झांकी में जम्मू और कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान के जाने-माने मशहूर हस्तशिल्प को खास तौर पर दिखाया गया, जिसमें पश्मीना बुनाई, अखरोट की लकड़ी की नक्काशी, कालीन बुनाई, पेपर-मैचे, तांबे के बर्तन और बसोहली मिनिएचर पेंटिंग शामिल हैं। विजुअल कहानी की शुरुआत एक बड़े, खुदे हुए समावार से हुई, जो कश्मीरी मेहमाननवाज़ी और गर्मजोशी का प्रतीक है। इसमें पारंपरिक लकड़ी की बनावट और हाउसबोट की तस्वीरें भी थीं, जो कश्मीर घाटी की अनोखी संस्कृति को दिखाती है। झांकी के बीच में एक पारंपरिक गांव थड्डा पर डोगरा छज्जा प्रदर्शित किया गया। इसमें ग्रामीण जीवन सामाजिक मेलजोल और सांस्कृती को दिखाया गया।
इसमें रौफ, कुड, जगरना, पहाड़ी, गोजरी और दमहाली जैसे शानदार लोक नृत्यों के प्रदर्शन भी इसमं शामिल था, जो जम्मू कश्मीर के विभिन्न प्रकार की सभ्यता-संस्कृतियों के ताने बाने को दिखा रहा था। राष्ट्रीय मंच पर जम्मू कश्मीर समृद्ध सभ्यता-संस्कृति को दर्शाती यह झांकी मशहूर रंगकर्मी और कला निदेशक पद्मश्री बलवंत ठाकुर ने तैयार किया था। संगीत नाटक अकादमी अवार्ड से सम्मानित पद्मश्री बलवंत ठाकुर आठ साल तक जम्मू कश्मीर कला,संस्कृति एवं भाषा अकादमी के सचिव रहे हैं।