घर की घंटी और विंड चाइम से बदलेगा भाग्य, सही दिशा में लगाने से मिलेगा शुभ फल

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नई दिल्ली : हवा के झोंकों के साथ जब घर में विंड चाइम या छोटी घंटियों की सुरीली आवाज गूंजती है, तो मन को एक अजीब सा सुकून मिलता है। लेकिन, क्या आपको पता है कि यह प्यारी सी आवाज सिर्फ सुनने में अच्छी नहीं लगती, बल्कि आपके जीवन से नकारात्मकता को दूर कर सुख-समृद्धि के द्वार भी खोल सकती है? वास्तु शास्त्र में ध्वनि तरंगों का बहुत महत्व है। सही दिशा में लगी विंड चाइम सोई हुई किस्मत को जगाने का काम करती है। वहीं, गलत दिशा में लगी घंटी मानसिक तनाव का कारण बन सकती है।

विंड चाइम खरीदते समय सबसे पहले उसकी दिशा और धातु पर ध्यान देना चाहिए। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप पश्चिम या उत्तर-पश्चिम दिशा में विंड चाइम लगाना चाहते हैं, तो धातु से बनी विंड चाइम का चुनाव करें। यह दिशा बच्चों के करियर और सौभाग्य के लिए उत्तम मानी जाती है। वहीं, अगर आप घर की पूर्व या दक्षिण-पूर्व दिशा को सजाना चाहते हैं, तो लकड़ी या बांस से बनी विंड चाइम सबसे शुभ फल देती है। ऐसा माना जाता है कि लकड़ी का तत्व विकास और उन्नति का प्रतीक है।

विंड चाइम में छड़ों की संख्या का भी अपना महत्व है। घर में शांति और क्लेश दूर करने के लिए 7 या 8 छड़ों वाली विंड चाइम लगानी चाहिए। वहीं, अगर आप अपनी लोकप्रियता या सामाजिक दायरे को बढ़ाना चाहते हैं, तो 6 छड़ों वाली विंड चाइम को उत्तर-पश्चिम दिशा में लटकाना लाभकारी होता है।

सिर्फ विंड चाइम ही नहीं, घर के मुख्य द्वार पर छोटी पीतल की घंटी लटकाना भी सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है। जब भी कोई दरवाजा खोलता है, तो घंटी की आवाज से घर की ‘डेड एनर्जी’ (रुकी हुई ऊर्जा) एक्टिव हो जाती है। यह आवाज घर में प्रवेश करने वाली नकारात्मक शक्तियों को बाहर ही रोक देती है।

वास्तु के अनुसार, कभी भी ऐसी जगह विंड चाइम न लगाएं, जहां उसके नीचे कोई बैठता हो या सोता हो। इसके अलावा, किचन या स्टोर रूम के अंधेरे कोनों में भी इसे लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि वहां इसकी ऊर्जा का सही प्रवाह नहीं हो पाता।

 

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