नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज सुबह 11 बजे लोकसभा में लगातार नौवां बजट पेश करेंगी। इस बार सरकार का मुख्य फोकस आर्थिक विकास को गति देने के लिए ‘मैन्यूफैक्चरिंग’ और ‘घरेलू मांग’ को बढ़ाने पर रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आयात पर निर्भरता कम करने और निर्यात के नए अवसर तलाशने में यह रणनीति असरदार साबित होगी।
औद्योगिक विकास और निर्यात पर जोर
सरकार स्थानीय उत्पादन बढ़ाने पर विशेष ध्यान देगी। वैश्विक मंदी के बावजूद मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर के लिए नई रियायतों और प्रोत्साहनों की संभावना है, जिससे लंबी अवधि में रोजगार और आर्थिक स्थिरता को बल मिलेगा।
शहरी और स्वास्थ्य ढांचे में सुधार
शहरों के आधुनिकीकरण और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के लिए बजट में बड़े आवंटन की संभावना है। इससे नागरिक सुविधाओं में सुधार और जीवन स्तर में वृद्धि होने की उम्मीद है।
नगर निकायों का वित्तीय कायाकल्प
स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नए राजस्व मॉडल अपनाने की योजना हो सकती है। इससे बुनियादी ढांचा सुधारने और शहरों में सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कृषि और किसान कल्याण
किसानों की आय बढ़ाने के लिए उनकी उत्पादकता में सुधार और व्यावसायिक फसलों की ओर प्रोत्साहन देने वाले उपाय पेश किए जा सकते हैं। सरकार की कोशिश होगी कि किसानों को लाभकारी योजनाओं से जोड़ा जाए और उनकी आय दोगुनी करने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
इनकम टैक्स में राहत नहीं, लेकिन पूंजीगत खर्च बढ़ सकता है
चालू वित्त वर्ष में टैक्स से राजस्व में बढ़ोतरी अपेक्षित नहीं है, इसलिए इनकम टैक्स में राहत की संभावना कम है। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इससे रोजगार सृजन और उत्पादन लागत में कमी आएगी।
राज्यों और चुनावी क्षेत्रों के लिए विशेष उपाय
पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु जैसे चुनावी राज्यों के लिए बजट में विशेष योजनाएं आ सकती हैं। रोजगार, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे नवीनतम उद्योगों को भी समर्थन देने पर ध्यान दिया जा सकता है।
फिस्कल डिफ़िसिट और आर्थिक स्थिरता
सरकार चालू वित्त वर्ष में जीडीपी के 4.4 प्रतिशत के लक्ष्य से फिस्कल डिफसिट को कम करने की कोशिश करेगी। इसके साथ ही संपदा के मौद्रीकरण और विनिवेश के जरिए अतिरिक्त राजस्व जुटाने की संभावना है।