नई दिल्ली : वास्तु शास्त्र में प्रतीकों और धातुओं का गहरा महत्व बताया गया है। अक्सर हम अपने जीवन में कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन फिर भी आर्थिक तंगी या मानसिक तनाव हमारा पीछा नहीं छोड़ता। वास्तु विज्ञान के अनुसार, ऐसी स्थिति में घर की ऊर्जा को संतुलित करना आवश्यक होता है। मछली, जिसे सनातन परंपरा और वास्तु दोनों में ही शुभता और निरंतरता का प्रतीक माना गया है, आपके बंद भाग्य के ताले खोल सकती है। यदि आप घर में जीवित मछलियां रखने में असमर्थ हैं, तो वास्तु शास्त्र धातु की मछली रखने की विशेष सलाह देता है। माना जाता है कि एक खास धातु से बनी यह नन्ही सी मछली न केवल आपके घर से नकारात्मकता को सोख लेती है, बल्कि धन-धान्य और खुशहाली के नए मार्ग भी प्रशस्त करती है।
वास्तु विज्ञान के अनुसार, पीतल की बनी मछली घर के लिए सबसे प्रभावशाली मानी जाती है। यह घर में शांति और धन के प्रवाह को बढ़ाती है। यदि आप इसे अपने लॉकर या तिजोरी में रखते हैं, तो यह अनावश्यक खर्चों को रोकती है और बचत बढ़ाती है।
धातु की मछली घर में मौजूद वास्तु दोषों के प्रभाव को कम करती है और नकारात्मक ऊर्जा को बाहर निकालती है। मछली को लक्ष्मी का कारक माना जाता है। इसे रखने से करियर में तरक्की और व्यवसाय में लाभ के योग बनते हैं। घर के सदस्यों के बीच कलह कम होती है और वातावरण खुशहाल रहता है।
मछली को हमेशा घर की उत्तर या पूर्व दिशा में रखना चाहिए। ये दिशाएं धन और स्वास्थ्य के लिए शुभ मानी जाती हैं। इसे आप अपने बैठक में किसी मेज या शोकेस में रख सकते हैं। यदि आप इसे अपने ऑफिस की टेबल पर रखते हैं, तो यह एकाग्रता और सफलता को बढ़ावा देती है।
मछली का मुंह हमेशा घर के अंदर की तरफ होना चाहिए, जिससे समृद्धि घर के भीतर आए। धातु की मछली पर धूल न जमने दें। इसकी चमक जितनी बरकरार रहेगी, सकारात्मक ऊर्जा उतनी ही प्रभावी होगी। यदि संभव हो तो मछलियों का जोड़ा रखें, यह वैवाहिक जीवन और संबंधों में मधुरता लाता है। यदि आप घर में असली फिश एक्वेरियम नहीं रख सकते, तो धातु की मछली उसका एक बेहतरीन और प्रभावशाली विकल्प है।