मोबाइल की लत बच्चों के दिमाग पर भारी, फोन छीना तो पढ़ाई छोड़ी, कहीं भागे तो कहीं उठाए आत्मघाती कदम

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हल्द्वानी। किशोरों में मोबाइल फोन की बढ़ती लत अब गंभीर मानसिक संकट का रूप लेती जा रही है। नोमोफोबिया यानी मोबाइल न होने का डर बच्चों के व्यवहार, पढ़ाई और मानसिक संतुलन पर गहरा असर डाल रहा है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि अभिभावकों द्वारा मोबाइल देने से मना करने पर बच्चे पढ़ाई छोड़ने, घर से भागने और यहां तक कि आत्मघाती कदम उठाने से भी नहीं हिचक रहे हैं। हाल ही में गाजियाबाद में तीन सगी बहनों के नौ मंजिला इमारत से कूदकर जान देने के पीछे भी मोबाइल की लत को वजह बताया गया।

कुमाऊं में बढ़ते मामले, मनोचिकित्सक भी चिंतित
डा. सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय में कुमाऊं भर से ऐसे मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चे ऑनलाइन गेमिंग, चैटिंग और रील्स को अपनी दिनचर्या का अहम हिस्सा बना चुके हैं। परिवार और दोस्तों से दूरी बनाकर वे घंटों कमरे में बंद रहकर डिजिटल दुनिया में खोए रहते हैं। मोबाइल छीने जाने पर उनमें आक्रामकता, चिड़चिड़ापन और हिंसक व्यवहार सामने आ रहा है। हाल के महीनों में मामलों की बढ़ती संख्या ने मनोवैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया है।

केस 1: मोबाइल से रोका तो दोस्तों संग घर से भागी नौवीं की छात्रा
शुक्रवार को नौवीं कक्षा में फेल हुई एक छात्रा का मामला सामने आया। छात्रा किताब में मोबाइल रखकर चैटिंग और रील्स देखने की आदी थी। परीक्षा में फेल होने पर जब कापी खुलवाई गई तो उसमें कुछ भी नहीं लिखा था। मोबाइल देने से मना किया गया तो वह दो छात्रों के साथ घर से भाग गई। पुलिस ने 20 दिन बाद तीनों को गोवा से बरामद किया, जहां वे एक होटल में काम कर रहे थे और बालिग होने पर विदेश जाने की तैयारी कर रहे थे।

केस 2: पिता ने छीना फोन, इंटर की परीक्षा देने से किया इनकार
कालाढूंगी रोड स्थित एक स्कूल के इंटरमीडिएट छात्र को ऑनलाइन गेमिंग की गंभीर लत थी। वह रोज करीब 16 घंटे मोबाइल पर गेम खेलता था। पिता का एटीएम कार्ड चुराकर उसने गेमिंग प्लेटफॉर्म पर करीब 50 हजार रुपये खर्च कर दिए। अकाउंट स्टेटमेंट से खुलासा होने पर पिता ने मोबाइल छीन लिया। इससे नाराज छात्र ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और बोर्ड परीक्षा देने से इनकार कर दिया।

केस 3: रील देखने से रोका तो हाथों की नस काटने की कोशिश
गोरापड़ाव क्षेत्र की एक हाईस्कूल छात्रा रोज छह से सात घंटे मोबाइल पर रील्स देखने में व्यस्त रहती थी। बोर्ड परीक्षा की तैयारी के बजाय फोन पर समय बिताने पर दिसंबर में अभिभावकों ने मोबाइल छीन लिया। गुस्से में आकर छात्रा ने खुद को कमरे में बंद किया और ब्लेड से दोनों हाथों की नस काटने का प्रयास किया।

केस 4: फोन ठीक नहीं कराया तो गटका कीटनाशक
पहाड़पानी क्षेत्र के 11वीं के छात्र को दोस्तों के साथ घंटों वीडियो कॉल करने की लत थी। फोन पानी में गिरने से खराब हो गया। माता-पिता ने फोन ठीक कराने से मना किया तो छात्र पढ़ाई छोड़ने और घर से भागने की बात करने लगा। स्वजन के रोकने पर उसने कीटनाशक गटक लिया। समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई।

विशेषज्ञों की चेतावनी, अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील
मोबाइल से दूर करने पर किशोरों के आत्मघाती कदम उठाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण बच्चों को कम उम्र में फोन देना और उसके इस्तेमाल की निगरानी न करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावक बचपन में बच्चों को मोबाइल देने से बचें, उन्हें किताबें पढ़ने और खेलकूद जैसी गतिविधियों में शामिल करें। नियमित संवाद बनाए रखते हुए बच्चों की मानसिक स्थिति और गतिविधियों पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
— डा. युवराज पंत, वरिष्ठ मनोविज्ञानी, एसटीएच

 

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