AI-Ready होंगे भविष्य के डॉक्टर: भारत ने तैयार किया AI आधारित वैश्विक मेडिकल पाठ्यक्रम, एम्स–WHO की संयुक्त पहल
नई दिल्ली से मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी पहल सामने आई है। भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वैश्विक मेडिकल पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसका उद्देश्य ऐसी नई चिकित्सा पीढ़ी तैयार करना है जो एआई के साथ नैतिकता, भरोसे और मानवीय विवेक के साथ दक्षता से काम कर सके। इस महत्वाकांक्षी पाठ्यक्रम को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के जेनेवा मुख्यालय के तकनीकी सहयोग से विकसित किया है। माना जा रहा है कि यह पहल आने वाले वर्षों में चिकित्सा, उपचार और मेडिकल शिक्षा की दिशा और दशा को नया स्वरूप दे सकती है।
एम्स प्रबंधन बुधवार को भारत सरकार और डब्ल्यूएचओ के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में ‘मेडिकल शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस साक्षरता को आगे बढ़ाना: एआई-रेडी कार्यबल की तैयारी’ विषय पर कार्यशाला आयोजित कर रहा है। इस कार्यक्रम में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की विशेष उपस्थिति की संभावना भी जताई गई है।
स्वास्थ्य सेवाओं में तेजी से बढ़ रही एआई की भूमिका
एआई तकनीक स्वास्थ्य सेवाओं, बायोमेडिकल अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रबंधन के पारंपरिक स्वरूप को तेजी से बदल रही है। मेडिकल इमेजिंग, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, उपचार योजना और जनसंख्या स्तर पर स्वास्थ्य निगरानी में एआई आधारित टूल्स का उपयोग बढ़ा है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि भविष्य के डॉक्टर और दंत चिकित्सक एआई के सही उपयोग, इसकी सीमाओं, नैतिक प्रभावों और रोगी सुरक्षा पर पड़ने वाले असर की वैज्ञानिक और चिकित्सीय समझ विकसित करें।
इसी उद्देश्य से एम्स ने स्नातक स्तर के एमबीबीएस और बीडीएस छात्रों के लिए एआई पाठ्यक्रम मॉड्यूल तैयार किया है। संस्थान का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि एआई को डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि क्लिनिकल रीजनिंग को मजबूत करने वाले सहयोगी उपकरण के रूप में विकसित किया जाए।
क्या है कार्यशाला का उद्देश्य
यह कार्यशाला डॉ. दीपिका मिश्रा और डॉ. वरुण सूर्य द्वारा आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य स्नातक मेडिकल और डेंटल शिक्षा में एआई साक्षरता को शामिल करने पर व्यापक संवाद को आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम में स्नातक दक्षताओं, फैकल्टी विकास, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और राष्ट्रीय व वैश्विक प्राथमिकताओं के साथ समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
एम्स–डब्ल्यूएचओ सहयोग का वैश्विक संदेश
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना के अनुरूप एम्स ने स्नातक स्तर पर विशेषज्ञता के विकास और उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए डब्ल्यूएचओ के तकनीकी सहयोग से यह पाठ्यक्रम तैयार किया है। मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ एम्स, वाधवानी एआई के तकनीकी सहयोग और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा शिक्षा मंत्रालय के समर्थन से डॉ. राधिका टंडन और डॉ. रोहित चावला के मार्गदर्शन में एआई आधारित स्वास्थ्य परियोजनाओं में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
डब्ल्यूएचओ की ओर से डॉ. एलेन लाब्रिक, डॉ. समीर पुजारी, राजेश्वरी सिंह और कनिका कालरा इस पहल से जुड़े हैं। वहीं एम्स की ओर से अकादमिक और क्लिनिकल चर्चाओं में डॉ. राजीव कुमार, डॉ. विवेक टंडन, डॉ. सोमेश गुप्ता और डॉ. कृतिका रंगराजन योगदान दे रहे हैं।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की भागीदारी
कार्यशाला में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के प्रतिनिधि प्रोफेसर गोपाल रामचूर्ण समेत डॉ. आंद्रेयास राइस, प्रोफेसर तनुजा नेसरी, प्रोफेसर क्लाउडिया साइट्ज और हैथम एल-नौश जैसे राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल होंगे।
एम्स के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिकित्सा का भविष्य है, लेकिन यह डॉक्टरों का विकल्प नहीं, बल्कि उनका सहयोगी है। हमारा लक्ष्य ऐसी मेडिकल पीढ़ी तैयार करना है जो एआई के साथ नैतिकता, भरोसे और मानवीय विवेक के साथ काम कर सके।”