झारखंड में सदर अस्पताल बनेंगे मॉडल एंटी रेबीज क्लिनिक, 2030 तक राज्य को रेबीज मुक्त बनाने की तैयारी

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झारखंड में रेबीज की रोकथाम और कुत्तों के काटने के मामलों में त्वरित इलाज सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। रांची से जारी निर्देशों के तहत राज्य के सभी सदर यानी जिला अस्पतालों को मॉडल एंटी रेबीज क्लिनिक के रूप में विकसित किया जाएगा। यह कदम कुत्तों के काटने पर त्वरित और प्रभावी उपचार से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में उठाया गया है।

डेडिकेटेड वाउंड वाशिंग एरिया होगा अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों के अनुसार, सभी एंटी रेबीज क्लिनिक में विशेष रूप से डेडिकेटेड वाउंड वाशिंग एरिया तैयार किया जाएगा। यहां कुत्ता या अन्य जानवर के काटने पर मरीज के घाव को कम से कम 15 मिनट तक बहते पानी और साबुन से धोने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि संक्रमण का खतरा कम किया जा सके।

वैक्सीन और सीरम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित
राज्य के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और सदर अस्पतालों तक एंटी रेबीज वैक्सीन और एंटी रेबीज सीरम की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी जिलों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

एनिमल बाइट मैनेजमेंट को लेकर जिलों को निर्देश
अभियान निदेशक ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को पत्र लिखकर एनिमल बाइट मैनेजमेंट और पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस से जुड़े दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार का लक्ष्य वन हेल्थ अप्रोच के तहत वर्ष 2030 तक झारखंड को पूरी तरह रेबीज मुक्त बनाना है।

डॉग बाइट की रिपोर्टिंग अब अनिवार्य
स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि झारखंड में रेबीज को नोटिफायबल डिजीज के रूप में अधिसूचित किया गया है। इसके तहत अब राज्य में डॉग बाइट के हर मामले की रिपोर्टिंग अनिवार्य रूप से आइएचआइपी-आइडीएसपी पोर्टल पर की जाएगी।

नए टीकाकरण प्रोटोकॉल लागू
नए टीकाकरण प्रोटोकॉल के तहत अब इंट्रा-डर्मल रूट से 0.1 मिली की खुराक निर्धारित दिनों—शून्य, तीसरे, सातवें और 28वें दिन—पर दी जाएगी। गंभीर मामलों में चिकित्सक की सलाह पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन के उपयोग को भी अनिवार्य किया गया है।

मेडिकल स्टाफ को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण
सभी सिविल सर्जनों को निर्देश दिया गया है कि अस्पतालों में तैनात मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को एनिमल बाइट मैनेजमेंट के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि मरीजों को समय पर और सही उपचार मिल सके। इसके साथ ही आम जनता के बीच इस व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

 

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