बोर्ड ऑफ पीस में पाकिस्तान की सिर्फ मौजूदगी? सहयोग पर उठे सवाल

अमेरिका, खाड़ी देशों और संयुक्त राष्ट्र की बड़ी प्रतिबद्धताएं; इंडोनेशिया 8,000 सैनिक भेजेगा, पाकिस्तान सूची से बाहर

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Pakistan Appears Agenda-Less at Board of Peace Meeting: Donald Trump द्वारा गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में Pakistan और उसके प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की मौजूदगी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। बैठक से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें शरीफ असहज स्थिति में नजर आते हैं।

इस घटनाक्रम के बाद कई सवाल उठ खड़े हुए हैं—आखिर इस बोर्ड में पाकिस्तान की भूमिका क्या है? वह शांति पहल में क्या ठोस योगदान देगा? और जो वादे किए गए हैं, क्या वे जमीनी स्तर पर पूरे होंगे? विश्लेषकों का मानना है कि अब तक सामने आई जानकारी से कोई स्पष्ट रणनीति या दीर्घकालिक विजन दिखाई नहीं देता। आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान फिलहाल कूटनीतिक समीकरण साधने और अमेरिकी समर्थन पाने की कोशिश में ज्यादा सक्रिय दिख रहा है, जबकि ठोस एजेंडा अब भी अस्पष्ट है।

Board of Peace के मंच पर हुई गतिविधियों ने एक बार फिर Pakistan की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को लेकर बहस तेज कर दी है। सियासी हलकों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif बैठक के दौरान खुद को अपेक्षाकृत अलग-थलग महसूस करते नजर आए। समूह तस्वीर में जहां Donald Trump के ठीक पीछे Saudi Arabia, Indonesia और Qatar जैसे देशों के नेता प्रमुख स्थान पर खड़े थे, वहीं शरीफ भीड़ के एक छोर पर दिखाई दिए।

विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थान और दृश्यता अक्सर कूटनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत देती है। यही कारण है कि इस तस्वीर को लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन तस्वीरों और वीडियो ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि वैश्विक शक्ति संतुलन में पाकिस्तान की मौजूदा भूमिका और प्रभाव कितना है।

Board of Peace के मंच पर हुई गतिविधियों ने एक बार फिर Pakistan की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को लेकर बहस तेज कर दी है। सियासी हलकों में चर्चा है कि प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif बैठक के दौरान खुद को अपेक्षाकृत अलग-थलग महसूस करते नजर आए। समूह तस्वीर में जहां Donald Trump के ठीक पीछे Saudi Arabia, Indonesia और Qatar जैसे देशों के नेता प्रमुख स्थान पर खड़े थे, वहीं शरीफ भीड़ के एक छोर पर दिखाई दिए।

विश्लेषकों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर स्थान और दृश्यता अक्सर कूटनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत देती है। यही कारण है कि इस तस्वीर को लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है, लेकिन तस्वीरों और वीडियो ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि वैश्विक शक्ति संतुलन में पाकिस्तान की मौजूदा भूमिका और प्रभाव कितना है।

Board of Peace की बैठक में गाजा में संभावित शांति मिशन को लेकर सदस्य देशों से सैन्य और आर्थिक सहयोग की अपेक्षा जताई गई। सूत्रों के मुताबिक कुछ देशों—जैसे Indonesia—ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए समर्थन या शर्तों की जानकारी सार्वजनिक कर दी है। वहीं Pakistan की ओर से किए गए शुरुआती संकेतों के बाद अब स्थिति को लेकर अस्पष्टता बनी हुई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि संसाधनों, आंतरिक प्राथमिकताओं और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए पाकिस्तान सावधानी से कदम बढ़ा रहा है। हालांकि, विरोधी दलों और कुछ पर्यवेक्षकों ने इसे प्रतिबद्धताओं पर पीछे हटने के रूप में पेश किया है, जिससे प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif को आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। आधिकारिक स्तर पर इस विषय में विस्तृत स्पष्टीकरण का इंतजार है।

आर्थिक चुनौतियों—गरीबी, महंगाई और वित्तीय दबाव—से जूझ रहे Pakistan की भूमिका Board of Peace की पहली बैठक में मुख्यतः औपचारिक उपस्थिति तक सीमित दिखी। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस मंच का उपयोग द्विपक्षीय बातचीत और संभावित सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए भी किया गया। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसे ठोस योगदान के अभाव के रूप में पेश किया है।

बैठक के दौरान एक क्षण ऐसा भी आया जब Donald Trump ने प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की ओर इशारा करते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “I like this guy।” पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस टिप्पणी ने उस समय के माहौल को कुछ सहज बनाया। फिलहाल, पाकिस्तान की आगे की रणनीति और संभावित प्रतिबद्धताओं पर आधिकारिक स्पष्टता का इंतजार है।

Board of Peace के तहत गाजा के पुनर्निर्माण और स्थिरता मिशन को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं। United States ने 10 अरब डॉलर की सहायता का वादा किया है, जबकि Qatar, Saudi Arabia और United Arab Emirates ने कम से कम 1-1 अरब डॉलर देने की घोषणा की है। FIFA गाजा में फुटबॉल परियोजनाओं के लिए 7.5 करोड़ डॉलर और United Nations मानवीय सहायता के लिए 2 अरब डॉलर उपलब्ध कराएगा।

सैन्य सहयोग के मोर्चे पर Morocco, Albania, Indonesia, Kazakhstan और Kosovo ने सैनिक भेजने की सहमति दी है। इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) को कुल 20,000 सैनिकों की जरूरत बताई गई है, जिसमें अकेले इंडोनेशिया ने 8,000 सैनिक भेजने की घोषणा कर बड़ी भूमिका निभाई है। ISF की कमान अमेरिकी मेजर जनरल जैस्पर जेफर्स संभालेंगे, जबकि डिप्टी कमांडर एक इंडोनेशियाई अधिकारी होंगे।

ध्यान देने वाली बात यह है कि सैनिक भेजने वाले देशों की सूची में Pakistan का नाम शामिल नहीं है, जिससे उसकी भूमिका को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

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