बिहार का पहला मॉडर्न मोक्षधाम तैयार: आदियोगी शैली की शिव प्रतिमा, 18 दाह-संस्कार की एक साथ सुविधा और ऑनलाइन बुकिंग व्यवस्था

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पटना में शहरी विकास की दिशा में एक बड़ी पहल के तहत बांस घाट पर बिहार का पहला मॉडर्न श्मशान घाट तैयार हो गया है। Patna Smart City और Bihar Urban Infrastructure Development Corporation की संयुक्त पहल से करीब 4.5 एकड़ में फैले इस अत्याधुनिक परिसर का निर्माण 89.40 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह नई व्यवस्था पुराने 1.24 एकड़ के श्मशान परिसर की तुलना में लगभग तीन गुना बड़ी है। पारंपरिक आस्था और आधुनिक तकनीक के संतुलन के साथ इसे सुव्यवस्थित, हरित और डिजिटल सुविधाओं से लैस बनाया गया है।

42 फीट ऊंचे ‘मोक्ष द्वार’ और ‘वैकुंठ द्वार’

परिसर में प्रवेश और निकास के लिए 42-42 फीट ऊंचे दो भव्य द्वार—मोक्ष द्वार और वैकुंठ द्वार—निर्मित किए गए हैं। एक द्वार प्रवेश के लिए और दूसरा निकास के लिए निर्धारित है। दोनों पर कांसे से बना ‘ॐ’ का प्रतीक स्थापित किया गया है, जिन्हें जालंधर के कारीगरों ने तैयार किया है। दूर से ही इन द्वारों की भव्यता ध्यान आकर्षित करती है और आध्यात्मिकता के साथ आधुनिक वास्तुशिल्प का प्रभाव प्रस्तुत करती है।

एक साथ 18 अंतिम संस्कार की व्यवस्था

नए परिसर में एक समय में 18 शवों के अंतिम संस्कार की सुविधा उपलब्ध है। इसमें 4 इलेक्ट्रिक ओवन, 6 सेमी-इलेक्ट्रिक और 8 पारंपरिक चिताएं बनाई गई हैं। इलेक्ट्रिक ओवन गुजरात से मंगाए गए हैं और इनमें 15 से 20 मिनट के भीतर दाह-संस्कार संभव है। पारंपरिक लकड़ी दाह-संस्कार में भी कम लकड़ी की खपत सुनिश्चित की गई है। धुएं के नियंत्रण के लिए आधुनिक चिमनी सिस्टम लगाया गया है।

90 प्रतिशत कम प्रदूषण, 12 हजार पौधों से हरित परिसर

इलेक्ट्रिक शवदाहगृह पारंपरिक लकड़ी की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाते हैं। पूरे परिसर में करीब 12 हजार पेड़-पौधे लगाए गए हैं, जो आंध्र प्रदेश से मंगाए गए हैं। हरित और शांत वातावरण बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) की ओर व्यू-कटर फ्रेम लगाए गए हैं। दीवारों पर ‘ॐ’ और त्रिशूल के स्टील फ्रेम सजाए जा रहे हैं।

आदियोगी की तर्ज पर 12 फीट ऊंची शिव प्रतिमा

परिसर के दो तालाबों के बीच 12 फीट ऊंची शिव प्रतिमा स्थापित की गई है, जिसे Adiyogi Shiva Statue की तर्ज पर तैयार किया गया है। 15 फीट ऊंचे त्रिशूल के साथ शिव की जटाओं से गंगा प्रवाहित होती हुई दिखाई गई है। फाइबर मटेरियल से बनी इस प्रतिमा को जालंधर के कारीगरों ने तैयार किया है। विशेष लाइटिंग के कारण रात में पूरा परिसर आध्यात्मिक आभा से आलोकित रहता है।

अस्थि विसर्जन के लिए अलग तालाब, गंगा जल की सीधी आपूर्ति

अस्थि विसर्जन और स्नान के लिए दो अलग-अलग तालाब बनाए गए हैं—एक 45 मीटर और दूसरा 65 मीटर लंबा। दो किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से गंगा जल सीधे इन तालाबों तक पहुंचाया जाता है। इससे गंगा नदी को प्रदूषण से बचाने में मदद मिलेगी और लोग धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन यहीं कर सकेंगे।

दीवारों पर जीवन से मृत्यु तक की कथा

श्मशान घाट की दीवारों पर जीवन और मृत्यु की यात्रा को चित्रित किया गया है। जन्म, कर्म और स्वर्ग-नरक के मार्ग तक का दृश्यांकन किया गया है। सत्य और शांति के संदेश अंकित हैं। राजा हरिश्चंद्र की कथा भी उकेरी गई है, जो शोकाकुल परिवारों को धैर्य और प्रेरणा देने का प्रयास करती है।

ऑनलाइन बुकिंग, व्हाट्सएप सुविधा और हेल्प डेस्क

Patna Municipal Corporation की वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध है। व्हाट्सएप चैटबोट (9264447449) से टिकट आईडी जनरेट की जा सकती है। मुक्ति रथ की बुकिंग और डेथ सर्टिफिकेट के लिए आवेदन की सुविधा भी डिजिटल माध्यम से दी गई है। सहायता के लिए हेल्प डेस्क टीम तैनात रहेगी, जिससे अव्यवस्था और लंबी कतारों से राहत मिलेगी।

राज्यभर में 40 आधुनिक शवदाह गृह निर्माणाधीन

बिहार में अत्याधुनिक तकनीक से 40 शवदाह गृह विकसित किए जा रहे हैं। इनमें से 20 का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। उत्तर बिहार के 12 और दक्षिण बिहार के 8 जिलों में काम समाप्त हो गया है और शेष स्थानों पर सौंदर्यीकरण अंतिम चरण में है। सभी केंद्रों पर इलेक्ट्रिक और पारंपरिक दोनों प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बांस घाट का यह मॉडल पूरे राज्य के लिए उदाहरण बनता जा रहा है।

 

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