तेल लाने के लिए सरकार खरीदेगी 59 नए जहाज, बचेंगे देश के पैसे!

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नई दिल्ली : भारत हर साल कच्चे तेल और ईंधन की ढुलाई के लिए विदेशी जहाजों पर निर्भर रहता है. इस रसद पर सालाना करीब 6 लाख करोड़ रुपये का भारी खर्च होता है. अब प्रमुख तेल कंपनियां इस खर्च को कम करने जा रही हैं. यह देश का पैसा बचाने की एक बड़ी पहल है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ एक खास जॉइंट वेंचर बनाने का बड़ा फैसला किया है.

इस प्रस्तावित नई कंपनी में तीनों सरकारी तेल कंपनियों की कुल 35 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी. वहीं, शिपिंग कॉर्पोरेशन इस नई कंपनी में 50 प्रतिशत के साथ प्रमुख भागीदार की भूमिका निभाएगा. बाकी बची 15 प्रतिशत हिस्सेदारी मैरीटाइम डेवलपमेंट फंड (MDF) के पास रहेगी. एमडीएफ सरकार की एक विशेष पहल है, जिसे समुद्री क्षेत्र में वित्तीय मदद देने के लिए 25,000 करोड़ रुपये के कोष के साथ बनाया गया है. इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी जहाजों पर निर्भरता को खत्म करना और मूल्यवान विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है.

शिपिंग कॉर्पोरेशन के चेयरमैन बीके त्यागी के अनुसार, इस जॉइंट वेंचर की तकनीकी शर्तों पर तेजी से काम चल रहा है. इस महायोजना के तहत 59 जहाज खरीदे जाएंगे. इनमें बड़े क्रूड कैरियर, गैस कैरियर और ऑफशोर जहाज शामिल होंगे. इस पूरी खरीद प्रक्रिया में लगभग 15,000 से 17,000 करोड़ रुपये का भारी निवेश होने का अनुमान है.

इस नई साझेदारी में सभी भागीदार कंपनियों की भूमिकाएं बिल्कुल स्पष्ट हैं. शिपिंग कॉर्पोरेशन अपनी तकनीकी, परिचालन और नियामक विशेषज्ञता इस वेंचर को प्रदान करेगा. दूसरी ओर, तेल कंपनियां दीर्घकालिक अनुबंधों के जरिए माल ढुलाई की पक्की गारंटी देंगी. इन जहाजों के प्रबंधन का पूरा जिम्मा शिपिंग कॉर्पोरेशन संभालेगा, जिसके लिए उसे एक निश्चित प्रबंधन शुल्क मिलेगा.

अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम से विदेशी झंडे वाले जहाजों को किराए पर लेने का चलन काफी हद तक घटेगा. इससे न केवल विदेशी मुद्रा बाहर जाने से रुकेगी, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी अभूतपूर्व रूप से मजबूत होगी. ढुलाई लागत के घरेलू नियंत्रण से ऊर्जा आपूर्ति का तंत्र भविष्य में अधिक स्थिर और सुरक्षित बन सकेगा.

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