Middle East War: अमेरिका-ईरान टकराव का 14वां दिन, खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमला और इराक में अमेरिकी विमान हादसा

मजबूत होती जा रही जंग, बढ़ता वैश्विक तनाव

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मिडिल ईस्ट में चल रहा अमेरिका-ईरान संघर्ष अब और गंभीर होता जा रहा है। जंग के 14वें दिन हालात और तनावपूर्ण हो गए जब ईरान ने शुरुआत में ही अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमला किया। इसी दौरान अमेरिकी सैन्य विमान से जुड़ा एक बड़ा हादसा सामने आया, जबकि फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर भी हमला हुआ। इन घटनाओं ने न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

इराक में अमेरिकी KC-135 विमान दुर्घटनाग्रस्त

संघर्ष के बीच अमेरिकी वायुसेना को बड़ा झटका लगा जब उसका KC-135 एयरलिफ्ट विमान इराक के पश्चिमी हिस्से में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार यह विमान सैन्य अभियान के दौरान ऑपरेशन में शामिल था। बताया जा रहा है कि इस मिशन में दो विमान शामिल थे। इनमें से एक विमान हादसे का शिकार हो गया, जबकि दूसरा विमान सुरक्षित रूप से लैंड करने में सफल रहा। दुर्घटना की खबर मिलते ही अमेरिकी सेना ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया और लापता क्रू मेंबर्स की तलाश के लिए बचाव दल मौके पर भेजे गए।

फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर बड़ा हमला

इसी बीच ईरान ने फारस की खाड़ी में दो विदेशी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। हमले के बाद दोनों जहाजों में भीषण आग लग गई, जिससे समुद्री क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक इन टैंकरों में से एक जहाज अमेरिकी कंपनी से जुड़ा हुआ था। आग लगने के कारण जहाजों को भारी नुकसान हुआ और एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है। हालांकि राहत की बात यह रही कि चालक दल के 38 सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया।

ईरान ने हमले की जिम्मेदारी ली

इस घटना के बाद ईरान ने इन हमलों की जिम्मेदारी स्वीकार की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान का हिस्सा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फारस की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य हमला वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर बड़ा असर डाल सकता है।

बढ़ सकता है वैश्विक ऊर्जा संकट

तेल टैंकरों पर हमले और सैन्य टकराव के बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो तेल की सप्लाई और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी यह संघर्ष अब नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। इराक में अमेरिकी विमान दुर्घटना और फारस की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हमला इस बात का संकेत हैं कि जंग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है।

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