1 अप्रैल से बदल जाएंगे टैक्स के नियम, इनकम टैक्स सिस्टम में लागू होंगे 7 बड़े बदलाव!

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नई दिल्ली: देश के टैक्स सिस्टम में 1 अप्रैल 2026 से कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। सरकार ने नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 को लागू करने का फैसला किया है, जिसके बाद कई पुराने नियम बदल जाएंगे। इन बदलावों का असर शेयर बाजार में निवेश, विदेश में पैसे भेजने, रिटर्न फाइल करने की समय सीमा और कुछ खास टैक्स दरों पर भी पड़ेगा। हालांकि राहत की बात यह है कि आम टैक्सपेयर्स के लिए टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

व्यापारियों को रिटर्न फाइल करने के लिए ज्यादा समय

अगर आप कारोबारी हैं और आईटीआर-3 या आईटीआर-4 के तहत रिटर्न फाइल करते हैं, तो अब आपको थोड़ा ज्यादा समय मिलेगा। सरकार ने बिना ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी है। इससे कारोबारियों को अपने खातों और दस्तावेजों को व्यवस्थित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना मिल जाएगा। हालांकि नौकरीपेशा लोगों के लिए आईटीआर-1 और आईटीआर-2 की डेडलाइन 31 जुलाई ही रहेगी।

गलती सुधारने के लिए मिलेगा ज्यादा वक्त

अगर रिटर्न भरते समय कोई गलती हो जाती है तो उसे सुधारने के लिए अब ज्यादा समय मिलेगा। पहले रिवाइज्ड रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 दिसंबर होती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है। यानी जिस वित्तीय वर्ष का टैक्स है, उसके खत्म होने तक टैक्सपेयर्स अपनी गलती सुधार सकेंगे। हालांकि 31 दिसंबर के बाद संशोधन करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है।

विदेश पैसे भेजने वालों को राहत

विदेश में पढ़ाई, इलाज या अन्य जरूरतों के लिए पैसे भेजने वाले लोगों के लिए भी नियम आसान किए गए हैं। पहले ऐसे ट्रांजेक्शन पर टैक्स कलेक्शन एट सोर्स की दर अलग-अलग मामलों में 5 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक होती थी। अब इसे सरल बनाते हुए एक समान 2 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे विदेश भेजी जाने वाली रकम पर टैक्स का बोझ कम होगा और रिफंड का झंझट भी घटेगा।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग पर बढ़ेगा खर्च

शेयर बाजार में फ्यूचर्स और ऑप्शंस यानी एफ एंड ओ में ट्रेडिंग करने वालों के लिए लागत बढ़ने वाली है। सरकार ने सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स की दर में बढ़ोतरी की है। अब फ्यूचर्स ट्रेड पर 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस पर 0.15 प्रतिशत टैक्स देना होगा। इसका सीधा असर ट्रेडिंग की कुल लागत पर पड़ेगा।

बायबैक और डिविडेंड पर बदले नियम

शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए बायबैक नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब कंपनियों द्वारा शेयर वापस खरीदने पर मिलने वाली रकम को कैपिटल गेन माना जाएगा और उसी हिसाब से टैक्स लगेगा। इसके अलावा अगर किसी निवेशक ने डिविडेंड कमाने के लिए कर्ज लिया है, तो अब उस कर्ज के ब्याज पर टैक्स छूट नहीं मिलेगी। पूरी डिविडेंड आय पर सामान्य आय के अनुसार टैक्स देना होगा।

कुछ कारोबारों पर TCS दर बढ़ी

सरकार ने कुछ खास सेक्टरों में टैक्स कलेक्शन एट सोर्स की दर भी बदली है। शराब, कबाड़ और खनिज उत्पादों की बिक्री पर अब टीसीएस 1 प्रतिशत की जगह 2 प्रतिशत लगाया जाएगा। वहीं तेंदू पत्ता कारोबार से जुड़े लोगों को राहत देते हुए इस पर लगने वाले टैक्स को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है।

 

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