भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का दिन भारी गिरावट लेकर आया। बुधवार की तेजी के बाद आज बाजार खुलते ही बिकवाली का दबाव इतना बढ़ा कि कुछ ही मिनटों में प्रमुख सूचकांक धड़ाम हो गए। ग्लोबल संकेतों की कमजोरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया।
सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट
कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 1600 अंकों से अधिक टूटकर 75,133 के स्तर तक फिसल गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी करीब 510 अंकों की गिरावट के साथ 23,300 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार खुलने से पहले ही गिफ्ट निफ्टी में करीब 550 अंकों की गिरावट ने संकेत दे दिया था कि दिन मुश्किल रहने वाला है।
निवेशकों के लाखों-करोड़ रुपये स्वाहा
तेज गिरावट के चलते बाजार पूंजीकरण में भारी कमी आई और निवेशकों के लाखों-करोड़ रुपये डूब गए। लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल बन गया।
पश्चिम एशिया का तनाव बना बड़ी वजह
विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और युद्ध की आशंकाओं ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करने का खतरा बढ़ा दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल का सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।
अमेरिकी बाजारों से मिला नकारात्मक संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी कमजोर संकेत मिले। अमेरिका में थोक महंगाई बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी, जिसका असर वहां के प्रमुख सूचकांकों पर भी दिखा। डाओ जोंस में 750 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
ब्याज दरों पर अनिश्चितता से बढ़ी चिंता
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने भले ही ब्याज दरों में बदलाव नहीं किया, लेकिन महंगाई को लेकर जताई गई चिंता ने बाजार की धारणा को कमजोर किया। विशेष रूप से पश्चिम एशिया के हालात को लेकर दी गई चेतावनी ने निवेशकों की आशंकाओं को और बढ़ा दिया।
एशियाई बाजारों में भी भारी दबाव
भारत के साथ-साथ अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट का रुख देखने को मिला। जापान और हांगकांग समेत कई प्रमुख बाजारों में बिकवाली हावी रही। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि वैश्विक स्तर पर निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं।
मंदी की आशंका ने बढ़ाई बेचैनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का तनाव लंबा खिंचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे में महंगाई बढ़ने और आर्थिक मंदी की आशंका ने बाजारों में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है।