श्रीलंका के तट के पास ईरानी युद्धपोत के डूबने की घटना के बाद पाकिस्तान ने भारत को घेरने के लिए सुनियोजित प्रोपेगैंडा अभियान चलाया, लेकिन जांच में इसकी पूरी सच्चाई सामने आ गई। सोशल मीडिया के जरिए भारत पर आरोप मढ़ने की कोशिश की गई कि इस हमले में उसने अमेरिका को अहम जानकारी दी थी, हालांकि बाद में यह दावा पूरी तरह झूठा साबित हुआ।
सोशल मीडिया पर फैलाया गया फर्जी नैरेटिव
4 मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिका द्वारा ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ पर हमला किए जाने और उसके डूबने के बाद सोशल मीडिया पर एक संगठित अभियान शुरू हुआ। इसमें दावा किया गया कि भारत ने अमेरिका को संवेदनशील जानकारी देकर इस हमले में भूमिका निभाई। जांच में सामने आया कि यह पूरी तरह से भ्रामक और मनगढ़ंत कहानी थी, जिसे पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क ने फैलाया।
OSINT जांच में खुली साजिश की परतें
ओपन सोर्स इंटेलिजेंस विश्लेषण में पाया गया कि 4 मार्च को ही एक सोशल मीडिया अकाउंट से इस तरह की पोस्ट की शुरुआत हुई। इसके बाद तेजी से इस नैरेटिव को फैलाया गया। करीब 100 अकाउंट्स से 500 के आसपास पोस्ट किए गए, जिनमें बड़ी संख्या पाकिस्तान से जुड़े यूजर्स की थी। घटना के तीन से छह घंटे के भीतर ही यह अभियान सक्रिय हो गया था और हैशटैग के जरिए इसे ट्रेंड कराने की कोशिश की गई।
पाकिस्तान से जुड़े अकाउंट्स की बड़ी भूमिका
विश्लेषकों के मुताबिक, इस अफवाह को फैलाने में लगभग 40 प्रतिशत अकाउंट पाकिस्तान से जुड़े थे। इसके अलावा 15 प्रतिशत प्रो-ईरान, 12 प्रतिशत प्रो-फिलिस्तीन और 8 प्रतिशत एंटी-वॉर कम्युनिटी से जुड़े अकाउंट्स भी इस मुहिम में शामिल रहे। कई फर्जी प्रोफाइल और एआई आधारित वीडियो के जरिए भी भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश की गई।
श्रीलंका ने अमेरिका को नहीं दी थी सैन्य अनुमति
इस पूरे घटनाक्रम के बीच श्रीलंका सरकार का रुख भी साफ रहा। राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने संसद में बताया कि देश ने मार्च की शुरुआत में अमेरिका के दो लड़ाकू विमानों को मत्ताला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर उतरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि श्रीलंका इस सैन्य गतिविधि में सीधे तौर पर शामिल नहीं था।
हमले में 84 नाविकों की मौत, कई को बचाया गया
4 मार्च को श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास गाले के निकट अमेरिका ने ‘आईआरआईएस देना’ को निशाना बनाया, जिसमें 84 नाविकों की मौत हो गई, जबकि 32 को बचा लिया गया। यह पोत भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित नौसैनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद लौट रहा था।
दूसरे ईरानी पोत को भी सीमित अनुमति
घटना के दो दिन बाद ईरान का एक अन्य पोत ‘आईआरआईएस बुशहर’ 219 नाविकों के साथ कोलंबो पहुंचा। श्रीलंका ने उसे तट से बाहर लंगर डालने के निर्देश दिए और बाद में त्रिंकोमाली बंदरगाह की ओर भेज दिया। इस दौरान 204 नाविकों को कोलंबो के पास नौसैनिक ठिकाने पर अस्थायी रूप से ठहराया गया।