4000 किमी दूर ईरान का मिसाइल वार, हिंद महासागर में अमेरिका-ब्रिटेन के सैन्य अड्डे को बनाया निशाना

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मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव अब नए भौगोलिक दायरे में फैलता दिख रहा है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान ने चागोस द्वीपसमूह स्थित डिएगो गार्सिया में मौजूद संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे की ओर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब वॉशिंगटन ने तेहरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को खत्म करने के संकेत दिए थे।

अमेरिका का जवाबी कदम, SM-3 इंटरसेप्टर से रोकने की कोशिश

मामले से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार, दागी गई दो मिसाइलों में से एक उड़ान के दौरान ही विफल हो गई, जबकि दूसरी को रोकने के लिए अमेरिकी युद्धपोत से SM-3 इंटरसेप्टर लॉन्च किया गया। हालांकि, यह साफ नहीं हो सका है कि मिसाइल को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया गया या नहीं। रिपोर्ट में मिसाइल दागे जाने का सटीक समय भी स्पष्ट नहीं किया गया है। SM-3 इंटरसेप्टर अमेरिकी नौसेना का अहम रक्षा हथियार माना जाता है, जो छोटी से मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने में सक्षम है। यह पारंपरिक विस्फोटक के बजाय उच्च गति से टकराकर लक्ष्य को निष्क्रिय करता है।

ब्रिटेन की भूमिका पर ईरान की नाराजगी

हाल के दिनों में ब्रिटेन द्वारा अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दिए जाने पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इससे पहले अमेरिकी नेतृत्व ने संकेत दिए थे कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने की दिशा में प्रगति हो रही है।

4000 किलोमीटर दूर तक पहुंचा मिसाइल खतरा

डिएगो गार्सिया की भौगोलिक स्थिति इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बनाती है। यह सैन्य अड्डा ईरान से करीब 4000 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसे में इस हमले के प्रयास को ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि हाल ही में ईरान की ओर से यह दावा किया गया था कि उसकी मिसाइल रेंज 2000 किलोमीटर तक सीमित है।

रणनीतिक लिहाज से बेहद अहम है डिएगो गार्सिया

हिंद महासागर में स्थित यह सैन्य अड्डा अमेरिका और ब्रिटेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र माना जाता है। इस बेस का इस्तेमाल क्षेत्र में सैन्य निगरानी और ऑपरेशन के लिए किया जाता है। ऐसे में इस पर संभावित हमला वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

 

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