अंतरिक्ष की दुनिया में अगले महीने एक ऐतिहासिक मिशन होने जा रहा है। नासा (NASA) का आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है। यह 1972 के अपोलो मिशन के बाद पहला ऐसा मिशन होगा, जिसमें इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा को पार कर गहरे अंतरिक्ष में जाएंगे और चंद्रमा के सबसे नजदीक से गुजरेंगे। मिशन को 2 अप्रैल 2026 को लॉन्च किया जाएगा। इसके लिए नासा ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट SLS (Space Launch System) को लॉन्च पैड पर तैनात कर दिया है।
Artemis II मिशन की खास बातें
आर्टेमिस II नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम का दूसरा क्रूड फ्लाईबाई मिशन है। इसमें एस्ट्रोनॉट चांद पर नहीं उतरेंगे, बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाकर पृथ्वी पर लौटेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ‘ओरियन’ अंतरिक्ष यान मानव यात्रा के लिए सुरक्षित है। यह 10 दिन का मिशन होगा, जिसमें अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी से करीब 4 लाख किलोमीटर दूर चंद्रमा के पास जाएंगे। मिशन की सफलता के बाद अगला कदम आर्टेमिस III होगा, जिसमें इंसान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेंगे और भविष्य में मंगल (Mars) यात्रा की तैयारी करेंगे।
मिशन के 4 जांबाज एस्ट्रोनॉट
इस ऐतिहासिक मिशन में चार अनुभवी एस्ट्रोनॉट शामिल हैं। कमांडर रीड वाइसमैन अमेरिकी नौसेना के कमांडिंग ऑफिसर हैं। पायलट विक्टर ग्लोवर चांद के पास पहुंचने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे। स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच चांद के पास जाने वाली पहली महिला होंगी। वहीं, कनाडा के जेरेमी हेंसन मिशन के पहले गैर-अमेरिकी सदस्य के तौर पर इतिहास बनाएंगे।
कैसे होगा सफर
लॉन्च फ्लोरिडा से SLS रॉकेट के जरिए होगा। पहले 24 घंटों में ओरियन कैप्सूल पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाएगा और लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जांच करेगा। इसके बाद कैप्सूल चंद्रमा की ओर बढ़ेगा। चांद का चक्कर लगाने के बाद ओरियन गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल कर पृथ्वी की ओर लौटेगा और प्रशांत महासागर में सुरक्षित स्प्लैशडाउन करेगा।
10 दिन में इतिहास
मिशन चांद की सतह पर नहीं उतरेगा, लेकिन अपोलो-13 द्वारा बनाए गए रिकॉर्ड (2,48,655 मील) को तोड़कर इंसान अब तक की सबसे लंबी दूरी तय करेंगे। ओरियन यान बिना अतिरिक्त ईंधन के चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण का उपयोग करेगा और पहली बार अंतरिक्ष से HD वीडियो डेटा भेजने के लिए लेजर तकनीक का इस्तेमाल होगा।
मिशन की अहमियत और भारत का कनेक्शन
Artemis II मिशन आर्टेमिस III और मंगल मिशनों की तैयारी का हिस्सा है। भारत भी ‘आर्टेमिस एकॉर्ड्स’ का सदस्य है, और इस मिशन की सफलता इसरो (ISRO) के चंद्रयान और भविष्य के स्पेस स्टेशन (BAS) मिशनों के लिए मार्ग खोलती है।
चुनौतियां और रिस्क
मिशन में सबसे बड़ी चुनौती हीट शील्ड की होगी। ओरियन की वापसी की रफ्तार 40,000 किमी प्रति घंटा होगी और तापमान 3000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। इसके अलावा अंतरिक्ष की रेडिएशन से चालक दल की सुरक्षा भी बड़ी चुनौती है।
नई अंतरिक्ष दौड़: अमेरिका बनाम चीन
आज अंतरिक्ष केवल विज्ञान नहीं, बल्कि भू-राजनीति का बड़ा अखाड़ा बन चुका है। अमेरिका अपने आर्टेमिस प्रोग्राम के जरिए चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहता है, वहीं चीन अपने चांग-ई मिशनों के जरिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस दौड़ का मुख्य उद्देश्य वहां मौजूद वॉटर आइस (जमे हुए पानी) के भंडार की खोज करना है।