पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोना और चांदी के निवेशकों की निगाहें बाजार की दिशा पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले सप्ताह कीमती धातुएँ सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ हल्की मजबूती दिखा सकती हैं। घरेलू स्तर पर निवेशकों की निगाह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति पर होगी, जो निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है।
महत्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक आंकड़ों पर निगाह
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च) प्रणव मेर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र की घटनाएं भविष्य में सोना-चांदी की कीमतों पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं वैश्विक स्तर पर निवेशक अमेरिका और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सर्विसेज PMI, ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर, GDP, पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर (PCE) और उपभोक्ता महंगाई (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं।
बीते सप्ताह की कीमतों में रिकवरी
पिछले सप्ताह, जो छुट्टियों के कारण छोटा रहा, MCX पर जून डिलीवरी वाला सोना 2,425 रुपये (1.65%) मजबूत हुआ, जबकि मई डिलीवरी वाली चांदी 4,541 रुपये (2%) बढ़ी। लगातार तीन हफ्तों की गिरावट के बाद सोना-चांदी में यह रिकवरी भारतीय रुपये की कमजोरी और बिटकॉइन में गिरावट के चलते निवेशकों का सुरक्षित विकल्प बुलियन की ओर रुख करने से हुई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मजबूती
वैश्विक स्तर पर कॉमेक्स पर जून डिलीवरी वाला सोना 155.4 डॉलर (3.43%) बढ़कर 4,679.7 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। मई डिलीवरी वाली चांदी 3.13 डॉलर (4.5%) की बढ़त के साथ 72.92 डॉलर प्रति औंस पर पहुंची। प्रणव मेर के अनुसार, सोने की कीमतें लगातार दूसरे सप्ताह मजबूती के साथ बंद हुईं, जबकि चांदी ने औद्योगिक धातुओं के साथ तेजी दिखाई।
भू-राजनीतिक तनाव और बाजार अनिश्चितता
विश्लेषकों ने बताया कि अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति के ईरान संबंधी बयान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण की स्थिति ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। हालांकि मजबूत भौतिक मांग और चीन में चांदी के रिकॉर्ड आयात ने कीमतों को सहारा दिया। चीन में 2026 की शुरुआती दो महीनों में चांदी का आयात 206.76 मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जो पिछले आठ वर्षों का उच्चतम स्तर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले सप्ताह सोना और चांदी की कीमतें सीमित दायरे में रहकर हल्की तेजी के रुख को बनाए रख सकती हैं।