रूस-ईरान के तेल पर अमेरिका का सख्त रुख, छूट खत्म करने का ऐलान; भारत समेत कई देशों की बढ़ी चिंता

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अमेरिका ने रूस और ईरान से कच्चा तेल खरीद पर दी जा रही छूट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज हो गई है। इस निर्णय का असर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर भी पड़ सकता है, जहां तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर नई चिंता खड़ी हो गई है।

छूट खत्म करने के फैसले से बढ़ेगी वैश्विक दबाव
अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि रूस और ईरान के तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी छूट अब आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। यह छूट सीमित समय के लिए दी गई थी ताकि युद्ध के कारण बाधित हुई तेल आपूर्ति को संतुलित किया जा सके। अब इस अवधि के समाप्त होने के साथ ही सख्ती फिर से लागू की जा रही है।

समुद्री तेल आपूर्ति पर भी सख्ती
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि समुद्र के रास्ते ईरानी तेल के व्यापार पर दी गई राहत भी समाप्त की जा रही है। यह छूट इसी सप्ताह खत्म हो रही है, जिसके बाद इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू होगा। वहीं रूसी तेल पर दी गई राहत भी सप्ताहांत के साथ समाप्त हो जाएगी।

भारत सहित आयातक देशों के लिए चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत समेत उन देशों पर असर पड़ेगा, जो रूस और ईरान से कच्चा तेल खरीदते रहे हैं। छूट खत्म होने के बाद तेल आपूर्ति में दबाव और कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिससे आर्थिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।

युद्ध के बीच दी गई थी अस्थायी राहत
अमेरिका ने पहले स्पष्ट किया था कि यह छूट अस्थायी रूप से दी गई थी, ताकि युद्ध के चलते वैश्विक बाजार में आई आपूर्ति की कमी को कुछ हद तक संतुलित किया जा सके। अब हालात बदलने के साथ इस राहत को समाप्त करने का फैसला लिया गया है।

ऊर्जा बाजार में बढ़ सकती है अस्थिरता
इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। भारत जैसे देशों को अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश और आयात रणनीति में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है।

 

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