MSME के लिए बड़ी राहत की तैयारी: ECLGS जैसी कर्ज गारंटी योजना पर विचार, मंत्रालय ने वित्तीय सेवा विभाग से बढ़ाई बातचीत

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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को आर्थिक मजबूती देने के लिए सरकार एक बार फिर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक संकट के बीच मंत्रालय ECLGS जैसी कर्ज गारंटी योजना लाने की संभावना पर विचार कर रहा है। इसके लिए सूक्ष्म, लघु एवं मझोला उद्यम मंत्रालय लगातार वित्तीय सेवा विभाग के संपर्क में है।

ECLGS जैसी नई योजना पर हो रहा विचार

एमएसएमई मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी दी है कि आपातकालीन कर्ज गारंटी योजना (ECLGS) जैसी व्यवस्था को फिर से लागू करने या उसके समान मॉडल पर काम करने को लेकर वित्तीय सेवा विभाग के साथ निरंतर चर्चा जारी है। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव रजनीश ने कहा कि यह विषय अभी विचाराधीन है और उचित समय आने पर विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

कोविड काल में शुरू हुई थी ECLGS योजना

गौरतलब है कि ECLGS योजना की शुरुआत मई 2020 में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य कोविड-19 महामारी के दौरान MSME क्षेत्र को आर्थिक राहत देना और उन्हें अपनी परिचालन देनदारियों को पूरा करने में सहायता प्रदान करना था, ताकि उद्योगों का संचालन बाधित न हो। यह योजना सभी क्षेत्रों के पात्र उद्यमों को कवर करती थी।

कच्चे माल की आपूर्ति और MSME नेटवर्क पर फोकस

मंत्रालय के अनुसार क्षेत्रीय अधिकारी लगातार एमएसएमई संगठनों और राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) के साथ मिलकर कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुटे हैं। पिछले तीन महीनों में एक लाख टन से अधिक कच्चा माल उपलब्ध कराया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 12.5 प्रतिशत अधिक है।

उद्यम पोर्टल पर बढ़ा पंजीकरण, क्षेत्र की मजबूती का संकेत

अतिरिक्त सचिव रजनीश ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद एमएसएमई क्षेत्र में मजबूत वृद्धि देखने को मिल रही है। फरवरी और मार्च में उद्यम पोर्टल पर 20 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों ने पंजीकरण कराया है, जिससे कुल पंजीकृत एमएसएमई की संख्या 60 करोड़ से अधिक हो गई है। इसे भारतीय एमएसएमई सेक्टर की मजबूती का संकेत माना जा रहा है।

आरबीआई का भी समर्थन, कर्ज सीमा में बढ़ोतरी

इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने भी सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए बिना गारंटी वाले कर्ज की सीमा को 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया है। इससे छोटे उद्यमों को आसान फंडिंग मिलने की उम्मीद और बढ़ गई है।

 

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