इजरायल-लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर, ट्रंप के ऐलान से थमी जंग; स्थायी शांति की कोशिशें तेज

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वॉशिंगटन/तेल अवीव/बेरूत। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी राहत की खबर सामने आई है। इजरायल और लेबनान के बीच जारी संघर्ष पर फिलहाल विराम लग गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 10 दिनों के संघर्षविराम का ऐलान करते हुए कहा कि दोनों देशों ने शांति स्थापित करने के लिए इस अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए बताया कि उनकी लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सकारात्मक बातचीत हुई, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। इजरायल की ओर से भी इस संघर्षविराम की पुष्टि की गई है।

ट्रंप बोले- शांति की दिशा में बड़ा कदम

ट्रंप ने कहा कि दशकों बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच सीधी बातचीत हुई है, जो एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल है। उन्होंने दावा किया कि यह उनके वैश्विक शांति प्रयासों का एक और अहम पड़ाव है और वे इसे स्थायी समाधान में बदलना चाहते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री समेत शीर्ष अमेरिकी नेतृत्व को निर्देश दिए गए हैं कि वे दोनों देशों के साथ मिलकर दीर्घकालिक शांति की दिशा में काम करें।

लेबनान के राष्ट्रपति ने जताया आभार

संघर्षविराम से पहले लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से बातचीत की थी। उन्होंने इस पहल के लिए ट्रंप का आभार जताते हुए कहा था कि यह कदम क्षेत्र में स्थिरता लाने में मददगार साबित हो सकता है।

सीजफायर से पहले तेज हुए थे हमले

संघर्षविराम के ऐलान से ठीक पहले जमीनी हालात काफी तनावपूर्ण थे। इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में अहम ठिकानों को निशाना बनाया था। तायर इलाके में एक महत्वपूर्ण पुल को भी ध्वस्त कर दिया गया, जिससे क्षेत्रीय संपर्क प्रभावित हुआ। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत और दो लोगों के घायल होने की खबर सामने आई थी, जबकि एक सैनिक भी जख्मी हुआ।

हिजबुल्लाह ने बातचीत पर उठाए सवाल

वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर हिजबुल्लाह ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। संगठन के वरिष्ठ नेता ने लेबनान सरकार के इजरायल से बातचीत के फैसले को गंभीर भूल बताया है। उनका कहना है कि ऐसी वार्ताएं देश के हित में नहीं हैं और इससे आंतरिक मतभेद बढ़ सकते हैं।

अब नजर स्थायी समाधान पर

हालांकि 10 दिनों का यह सीजफायर अस्थायी है, लेकिन इसे लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष को खत्म करने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह विराम स्थायी शांति में बदल पाएगा या फिर क्षेत्र एक बार फिर तनाव की आग में झोंक दिया जाएगा।

 

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