नई दिल्ली में महिला आरक्षण को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ यानी महिला आरक्षण कानून 2023 को गुरुवार से पूरे देश में लागू कर दिया गया। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब संसद में इस कानून में संशोधन और इसके लागू होने की समयसीमा को लेकर जोरदार चर्चा जारी है।
गौरतलब है कि गुरुवार को ही इस अधिनियम में बदलाव से जुड़ा विधेयक लोकसभा में पेश किया गया, जिस पर देर रात करीब 1:20 बजे तक बहस चली। आज भी इस मुद्दे पर दिनभर चर्चा जारी रहने के बाद शाम करीब 4 बजे मतदान होने की संभावना जताई गई है।
देर रात तक संसद में गूंजा महिला आरक्षण का मुद्दा
महिला आरक्षण विधेयक को लेकर लोकसभा में तीखी और लंबी बहस देखने को मिली। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान अलग-अलग दलों ने अपनी-अपनी राय रखी। इसी बीच केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाते हुए महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को औपचारिक रूप से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी।
केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन में इस फैसले की पुष्टि की गई है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि जब संसद में इस कानून में संशोधन और इसे 2029 तक लागू करने पर चर्चा चल रही है, तब इसे 16 अप्रैल से प्रभावी घोषित करने का निर्णय क्यों लिया गया।
नए विधेयकों पर भी चर्चा, आगे की रणनीति तय
संसद में आगे की प्रक्रिया के तहत केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा 16 अप्रैल को पेश किए गए प्रस्ताव पर विचार करते हुए कुछ अहम विधेयकों को पारित करने की तैयारी है। इनमें संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 शामिल हैं, जो महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से सीधे तौर पर जुड़े माने जा रहे हैं।
क्या है महिला आरक्षण कानून और कब मिलेगा इसका लाभ
जारी अधिसूचना के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम 2023 के तहत केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को इस कानून के लागू होने की तिथि घोषित की है। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है।
हालांकि, इस कानून का वास्तविक लाभ तुरंत नहीं मिल सकेगा। इसके पीछे प्रमुख वजह यह है कि आरक्षण का क्रियान्वयन 2027 की जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। इस पूरी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही यह तय होगा कि किन सीटों पर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाएगा। ऐसे में मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, महिलाओं को इसका लाभ 2034 से पहले मिल पाना मुश्किल माना जा रहा है।