ग्रेटर नोएडा में ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ के तहत प्रेस वार्ता आयोजित, महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने पर जोर

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गौतमबुद्धनगर। “सशक्त नारी, सशक्त भारत” के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए ग्रेटर नोएडा में ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान समाज की प्रतिष्ठित और प्रभावशाली महिलाओं ने मंच साझा करते हुए महिला सशक्तिकरण और नारी वंदन अधिनियम पर विस्तार से अपने विचार रखे।

प्रतिष्ठित महिलाओं ने साझा किए अनुभव और विचार

प्रेस वार्ता में 1980 बैच की सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी निवेदिता पी. हरन, आइबीए एसोसिएशन की वाइस प्रेसिडेंट डॉ. खुशबू सिंह, एडवोकेट कविता नागर, लोकल कंप्लायंस कमेटी की सदस्य माला भंडारी और वेदिका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. सपना ने भाग लिया। सभी वक्ताओं ने महिलाओं के अधिकार, उनकी बदलती भूमिका और समाज में बढ़ती भागीदारी को लेकर अपने अनुभव साझा किए।

नारी वंदन अधिनियम को बताया ऐतिहासिक कदम

वक्ताओं ने कहा कि नारी वंदन अधिनियम, 2023 महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है। इस कानून के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए उप-आरक्षण भी शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के बाद लागू होगी।

लोकतंत्र को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में प्रयास

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाना और निर्णय लेने की प्रक्रिया में लैंगिक संतुलन स्थापित करना है। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने में मदद मिलेगी, साथ ही नीति निर्माण में महिलाओं के दृष्टिकोण को सशक्त स्थान मिलेगा।

अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ कार्यक्रम

इस अवसर पर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की भी उपस्थिति रही। अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीलक्ष्मी वी.एस., ओएसडी अर्चना द्विवेदी, गुंजा सिंह और उप जिलाधिकारी दादरी अनुज नेहरा सहित अन्य अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

सशक्त नारी से सशक्त भारत की दिशा में पहल

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ और नारी वंदन अधिनियम के जरिए महिलाओं को सशक्त बनाकर देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत किया जा रहा है। यह पहल न केवल महिलाओं को नई पहचान देगी, बल्कि “सशक्त नारी, सशक्त भारत” के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।

 

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