Narad Jayanti 2026: 2 मई को मनाई जाएगी देवर्षि नारद जयंती, जानिए शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

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हिंदू धर्म में वैशाख और ज्येष्ठ माह का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और इसी क्रम में देवर्षि नारद मुनि की जयंती भी श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाती है। सृष्टि के प्रथम पत्रकार कहे जाने वाले नारद मुनि की जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 2 मई, शनिवार को मनाया जाएगा।

नारद जयंती का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में नारद जयंती का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन देवर्षि नारद मुनि का अवतरण हुआ था। उन्हें सृष्टि का पहला पत्रकार भी कहा जाता है, क्योंकि वे तीनों लोकों में संवाद और सूचनाओं का आदान-प्रदान करते थे। पौराणिक मान्यता यह भी है कि वे भगवान ब्रह्मा के पुत्र हैं और भगवान विष्णु के परम भक्तों में शामिल हैं।

तिथि और पंचांग के अनुसार गणना

पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि 1 मई 2026 को रात 10 बजकर 52 मिनट से शुरू होकर 3 मई को रात 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर नारद जयंती का पर्व 2 मई 2026 को मनाया जाएगा।

शुभ मुहूर्त का विशेष संयोग

नारद जयंती के दिन पूजा-अर्चना के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 4:14 बजे से 4:57 बजे तक रहेगा, जो साधना और पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक रहेगा, जबकि गोधूलि मुहूर्त शाम 6:56 बजे से 7:17 बजे तक रहेगा। इसके अलावा त्रिपुष्कर योग 3 मई की मध्यरात्रि 12:49 बजे से सुबह 5:39 बजे तक रहेगा, जिसे विशेष फलदायी माना जाता है।

पूजा विधि: ऐसे करें देवर्षि नारद की आराधना

नारद जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा का संकल्प लें। घर के मंदिर में सबसे पहले भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद देवर्षि नारद मुनि का स्मरण कर उनकी आराधना करें। भगवान विष्णु को चंदन, कुमकुम और ताजे फूल अर्पित करें और पंचामृत, फल या घी से बने प्रसाद का भोग लगाएं। विशेष ध्यान रखें कि भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। अंत में भगवान विष्णु और नारद मुनि की आरती कर पूजा का समापन करें।

आस्था और श्रद्धा का प्रतीक है यह पर्व

नारद जयंती केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, भक्ति और संचार के महत्व को भी दर्शाती है। इस दिन भगवान विष्णु की उपासना और नारद मुनि का स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

 

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