असम चुनाव में आम आदमी पार्टी का बुरा प्रदर्शन, 1 फीसदी वोट भी नहीं जुटा सकी AAP; केजरीवाल के लिए बड़ा राजनीतिक झटका
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव नतीजों ने देश की राजनीति में कई बड़े संदेश दिए हैं। जहां भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के लिए कई राज्यों से सकारात्मक संकेत मिले, वहीं कई क्षेत्रीय दलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इन चुनावी नतीजों के बीच अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के लिए भी असम से निराशाजनक खबर सामने आई है।
असम विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा। चुनावी आंकड़ों ने साफ कर दिया कि राज्य में पार्टी मतदाताओं के बीच प्रभाव बनाने में पूरी तरह नाकाम रही।
124 सीटों वाले राज्य में 21 उम्मीदवार उतारे थे
असम विधानसभा की 124 सीटों के लिए हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 21 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। पार्टी ने भाजपा से पहले अपने उम्मीदवारों की घोषणा करके यह संदेश देने की कोशिश की थी कि वह राज्य की राजनीति में गंभीरता से उतर रही है।
AAP ने कई ऐसे चेहरों को टिकट दिया था जो स्थानीय स्तर पर सक्रिय माने जाते थे। हालांकि इनमें से अधिकांश उम्मीदवार राज्य या राष्ट्रीय राजनीति में ज्यादा पहचान नहीं रखते थे। पार्टी ने अपने चुनाव प्रचार में अरविंद केजरीवाल के मॉडल और ‘झाड़ू’ चुनाव चिन्ह को प्रमुखता से आगे रखा था।
इसके बावजूद मतदाताओं के बीच पार्टी पकड़ नहीं बना सकी।
0.13 फीसदी वोट शेयर पर सिमटी पार्टी
दोपहर दो बजे तक सामने आए चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी को असम में महज 0.13 फीसदी वोट हासिल हुए। यह आंकड़ा पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि राज्य में ‘नोटा’ को भी आम आदमी पार्टी से कहीं ज्यादा समर्थन मिला। आंकड़ों के अनुसार नोटा को करीब 1.30 फीसदी वोट प्राप्त हुए, जो AAP के वोट शेयर से कई गुना ज्यादा है।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने करीब 40 फीसदी वोट शेयर के साथ राज्य में एक बार फिर मजबूत बढ़त हासिल की और प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ती नजर आई।
इन सीटों पर उतारे थे उम्मीदवार
आम आदमी पार्टी ने नौबोइचा से अच्युत दास, डेरगांव से पुलिन गोगोई, गोहपुर से जारबोम कुतुम, सेंट्रल गुवाहाटी से अनूपा डेकाराजा और खुमताई से आशीष हजारिका को मैदान में उतारा था।
इसके अलावा सिबसागर से तपन गोगोई, रोंगानादी से टिकेंद्र थापा, चेंगा से जाहिदु इस्लाम खान, नादुआड़ से रंजीत बोरो और तियाबर से पल्लव सैकिया को टिकट दिया गया था।
ईस्ट गोलपाड़ा से जिन्ना अमीर हुसैन, राहा से बरुण बिकास दास, बोकाजन से रेणुका तिमुंगपी, विश्वनाथ से अनंता गोगोई और बरहमपुर से रानू माई तेरोंपी चुनावी मैदान में थे।
वहीं दीफू से बिरेश दीफोएसा, जोरहाट से प्रणब प्रियंगशु दत्ता, नॉर्थ करीमगंज से सयनुल हक, पलाशबाड़ी से एलविन बरुआ, दिसपुर से बल्लव पात्रा और न्यू गुवाहाटी से आदित्य गोगोई को उम्मीदवार बनाया गया था।
आने वाले चुनावों से पहले बढ़ी चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में यह प्रदर्शन आम आदमी पार्टी के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, खासकर तब जब पार्टी अगले साल पंजाब, गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में अपनी ताकत बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
हालांकि असम चुनाव में पार्टी के बड़े नेता ज्यादा सक्रिय नजर नहीं आए, लेकिन नतीजों ने यह साफ संकेत दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की रणनीति अभी AAP के लिए आसान नहीं दिख रही।