कानपुर DM की संवेदनशील पहल: गुल्लक टूटने से टूटा सपना, ‘जनता दर्शन’ में अनोखे फैसले से बच्ची के चेहरे पर लौटी मुस्कान

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कानपुर: कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान बुधवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे माहौल को भावुक कर दिया। 11 वर्षीय इस्वा खां अपनी मां शन्नो और छोटी बहन मरियम फातिमा के साथ जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के सामने पहुंची। परिवार जाजमऊ क्षेत्र का रहने वाला है। मां की शिकायत भले ही घरेलू विवाद से जुड़ी थी, लेकिन इसी बीच सामने आई बच्ची की गुल्लक से जुड़ी कहानी ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

गुल्लक टूटी तो बिखर गया सपना
शिकायत के दौरान शन्नो ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी इस्वा कई महीनों से अपनी मिट्टी की गुल्लक में पैसे जमा कर रही थी। कभी रिश्तेदारों से मिले रुपये, कभी स्कूल खर्च से बचाए पैसे, तो कभी घर में मिले सिक्के—वह हर छोटी बचत को सहेजकर रखती थी।
उसका सपना था कि गुल्लक भरने के बाद वह अपने लिए नया स्कूल बैग, किताबें और पढ़ाई का जरूरी सामान खरीदेगी। पढ़ाई के प्रति उसकी लगन से परिवार भी खुश था, लेकिन घरेलू विवाद ने इस मासूम ख्वाब को तोड़ दिया।

विवाद में तोड़ी गई गुल्लक, निकाल लिए पैसे
परिवारिक झगड़े के दौरान घर का सामान ही नहीं, बल्कि बच्ची की गुल्लक भी तोड़ दी गई और उसमें जमा पैसे निकाल लिए गए। इस घटना से इस्वा और उसकी बहन मरियम बेहद दुखी हो गईं।
मां ने बताया कि इस मामले की शिकायत पहले थाने में भी की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर जिलाधिकारी ने तुरंत जाजमऊ थाना प्रभारी को फोन कर मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

मासूम की बात सुन भावुक हुआ माहौल
जनता दर्शन के दौरान जब यह मामला सामने आया तो जिलाधिकारी ने खुद बच्ची से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि वह गुल्लक में क्या जमा करती थी। इस पर इस्वा ने मासूमियत से बताया कि वह रोज थोड़ा-थोड़ा पैसा बचाती थी ताकि स्कूल बैग खरीद सके।
बच्ची की यह बात सुनते ही वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। छोटी बहन मरियम भी चुपचाप पास खड़ी रही। दोनों के चेहरे पर उदासी साफ दिखाई दे रही थी।

डीएम ने लौटाई मुस्कान, दिया खास तोहफा
इसके बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बच्चियों को अपने पास बुलाया और स्नेहपूर्वक उनसे बात की। उन्होंने दोनों को नया मिट्टी का गुल्लक और स्कूल बैग भेंट किया।
सबसे खास पल तब आया जब उन्होंने खुद बच्चियों के हाथों से नए गुल्लक में एक हजार रुपये डलवाए। इस पहल के बाद कुछ ही पलों में दोनों बहनों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई और पूरा माहौल भावुक हो उठा।

बच्चियों को दी सीख, बचत और पढ़ाई पर जोर
जिलाधिकारी ने बच्चियों को समझाया कि पैसे बचाने की आदत बहुत अच्छी होती है और इसे जारी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेहनत और लगन से देखे गए सपनों को कोई नहीं तोड़ सकता।
इस घटना ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। रोजाना सैकड़ों शिकायतों के बीच एक छोटी बच्ची की गुल्लक और उसके टूटे सपनों की कहानी ने जनता दर्शन को एक यादगार पल में बदल दिया।

 

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