विदेश दौरे पर गए अफसरों के लिए बिहार सरकार का सख्त आदेश, लौटते ही बताना होगा क्या सीखा और कैसे होगा इस्तेमाल

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पटना: बिहार सरकार ने विदेश यात्रा करने वाले अधिकारियों के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। अब किसी आधिकारिक कार्यक्रम, सेमिनार, सम्मेलन या प्रशिक्षण में विदेश जाने वाले अफसरों को लौटने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जमा करनी होगी। सरकार ने साफ किया है कि अधिकारियों को यह बताना पड़ेगा कि उन्होंने विदेश दौरे के दौरान क्या सीखा और उसका उपयोग राज्य प्रशासन में किस तरह किया जा सकता है।

सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक जवाबदेही और कार्यक्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

15 दिनों के भीतर जमा करनी होगी रिपोर्ट

सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से इस संबंध में सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिवों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि विदेश यात्रा से लौटने के 15 दिनों के भीतर संबंधित अधिकारी को निर्धारित प्रारूप में अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी।

रिपोर्ट में विदेश यात्रा के दौरान प्राप्त अनुभव, नई जानकारी और प्रशासनिक स्तर पर उसके संभावित उपयोग का विस्तृत उल्लेख करना अनिवार्य होगा।

विदेश से मिली सीख का प्रशासन में होगा इस्तेमाल

सरकार चाहती है कि विदेशों में आयोजित कार्यक्रमों से मिलने वाले अनुभव और आधुनिक कार्यप्रणालियों का लाभ बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था को भी मिले। इसी उद्देश्य से अधिकारियों को विस्तार से बताना होगा कि उन्होंने कौन-कौन सी नई व्यवस्थाएं, तकनीक या प्रशासनिक मॉडल देखे और उन्हें राज्य में कैसे लागू किया जा सकता है।

सरकार का मानना है कि इससे विभागों के कामकाज में सुधार और नई सोच को बढ़ावा मिलेगा।

नीतिगत सुधार और दक्षता बढ़ाने पर जोर

सामान्य प्रशासन विभाग के मुताबिक, अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर राज्य में नीतिगत सुधार और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। साथ ही विभिन्न विभागों में नई कार्यप्रणालियों को लागू करने की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि विदेश यात्राओं का लाभ केवल व्यक्तिगत अनुभव तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसका असर सरकारी व्यवस्था और जनता से जुड़े कामों में भी दिखाई देना चाहिए।

सरकारी खर्च के बेहतर उपयोग पर फोकस

बिहार सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि विदेश दौरों पर सरकारी धन खर्च होता है, इसलिए यह जरूरी है कि उसका प्रत्यक्ष लाभ प्रशासनिक तंत्र को मिले। नई व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि विदेश यात्राओं से हासिल ज्ञान और अनुभव राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधार में उपयोगी साबित हों।

 

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