ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका, अभिषेक बनर्जी के प्रभाव वाले फलता में TMC का सियासी आधार कमजोर

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कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के लिए फलता विधानसभा क्षेत्र कभी मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन अब यही इलाका पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है। डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस इलाके में कभी टीएमसी का दबदबा साफ नजर आता था, लेकिन हालात तेजी से बदले हैं। बाहुबली छवि वाले नेता जहांगीर खान के चुनावी मैदान से हटने के बाद पार्टी की स्थिति कमजोर पड़ गई है और क्षेत्र में टीएमसी की मौजूदगी लगभग गायब होती दिख रही है।

कुछ ही दिनों में बदल गया सियासी माहौल

29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के दौरान फलता क्षेत्र में तृणमूल कांग्रेस के झंडे, पोस्टर और कार्यकर्ताओं की सक्रियता हर जगह दिखाई दे रही थी। हालांकि, कुछ ही दिनों बाद पूरा राजनीतिक परिदृश्य बदल गया। स्थानीय स्तर पर अब दूसरे दलों के झंडे और प्रचार सामग्री नजर आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पूरे विधानसभा क्षेत्र में टीएमसी का एक भी झंडा दिखाई नहीं दे रहा था।

इसी बीच, चुनावी मैदान छोड़ने वाले जहांगीर खान भी इलाके से पूरी तरह गायब बताए जा रहे हैं। बताया गया कि गुरुवार को हुए पुनर्मतदान के दौरान भी वह नजर नहीं आए। स्थानीय लोगों के अनुसार, उन्हें आखिरी बार मंगलवार को देखा गया था और उसी दिन उन्होंने चुनाव से हटने का फैसला लिया था।

अभिषेक बनर्जी के करीबी माने जाते हैं जहांगीर खान

जहांगीर Khan को डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता रहा है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में इस इलाके में टीएमसी को 89 फीसदी से अधिक वोट मिले थे, जिसे अभिषेक बनर्जी के प्रभाव का बड़ा संकेत माना गया था। हालांकि, खान के अचानक चुनाव से हटने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने इसे उनका व्यक्तिगत फैसला बताते हुए खुद को अलग कर लिया।

पुनर्मतदान में 86 फीसदी से ज्यादा वोटिंग

गुरुवार को हुए पुनर्मतदान में शांतिपूर्ण तरीके से मतदान संपन्न हुआ। निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय बलों की भारी तैनाती की गई थी। चुनाव आयोग के अनुसार, सीट पर 86 फीसदी से अधिक मतदान दर्ज किया गया।

दरअसल, 29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद कई बूथों से शिकायतें सामने आई थीं। आरोप था कि कुछ ईवीएम मशीनों पर इत्र जैसे पदार्थ और चिपकने वाली टेप का इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया गया।

अब भाजपा और लेफ्ट के बीच सीधी टक्कर

जहांगीर खान के चुनावी मैदान से हटने के बाद तृणमूल कांग्रेस की स्थिति लगभग खत्म होती नजर आ रही है। ऐसे में अब मुकाबला मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रत्याशी शंभूनाथ कुर्मी के बीच माना जा रहा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से अब्दुर रज्जाक मोल्ला चुनावी मैदान में हैं।

भवानीपुर के बाद TMC के लिए एक और बड़ा झटका

फलता में कमजोर पड़ती स्थिति ऐसे समय सामने आई है, जब हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें पश्चिम बंगाल के मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था। इससे पहले वर्ष 2021 में भी ममता बनर्जी नंदीग्राम सीट पर शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव हार चुकी हैं।

 

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