यूपी के इस शहर की बदलेगी तकदीर! बंद पड़ी जेपी की 243 एकड़ जमीन पर अडानी ग्रुप करेगा अरबों का मेगा निवेश, बनेगा लॉजिस्टिक्स हब
कानपुर: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की नई कहानी लिखी जा रही है और इस बार केंद्र में राजधानी लखनऊ या नोएडा नहीं, बल्कि कानपुर है। अडानी ग्रुप की बड़ी रणनीतिक डील के बाद अब कानपुर में एक विशाल लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग हब विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है, जिससे पूरे उत्तर भारत की सप्लाई चेन व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
243 एकड़ जमीन पर अडानी की नजर, बड़ा अधिग्रहण पूरा होने की ओर
सूत्रों के अनुसार, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड, संकटग्रस्त कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड की सहायक इकाई जेपी फर्टिलाइजर्स की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिग्रहण करने जा रही है। यह डील करीब 1,500 करोड़ रुपये के नकद लेनदेन में पूरी होने की संभावना है। इस अधिग्रहण के बाद कानपुर स्थित 243 एकड़ की जमीन पर अडानी समूह का अप्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित हो जाएगा।
फर्टिलाइजर यूनिट नहीं, बनेगा आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब
जानकारी के मुताबिक, इस जमीन का उपयोग अब पारंपरिक खाद उत्पादन के लिए नहीं किया जाएगा। अडानी ग्रुप यहां एक अत्याधुनिक मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क और वेयरहाउसिंग हब विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इससे कानपुर को उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
कानपुर बनेगा उत्तर भारत का लॉजिस्टिक्स केंद्र
कानपुर की भौगोलिक स्थिति इस प्रोजेक्ट को और भी महत्वपूर्ण बनाती है। यहां से दिल्ली, लखनऊ, प्रयागराज और अन्य बड़े बाजारों तक माल की आवाजाही काफी आसान हो जाएगी। सड़क, रेल और वेयरहाउसिंग नेटवर्क से जुड़ा यह प्रोजेक्ट सप्लाई चेन सिस्टम को अधिक मजबूत और तेज बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
वेदांता को पीछे छोड़ अडानी ने हासिल की बढ़त
इस अधिग्रहण की दौड़ में कई बड़ी कंपनियां शामिल थीं, जिनमें वेदांता समूह भी था। हालांकि लेनदारों ने अडानी के करीब 14,535 करोड़ रुपये के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी है। यह प्रक्रिया अब एनसीएलटी और एनसीएलएटी की स्वीकृति के बाद आगे बढ़ रही है और लगभग 90 दिनों के भीतर डील पूरी होने की उम्मीद है।
निवेश के साथ रोजगार के नए अवसर
इस मेगा प्रोजेक्ट से कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है। साथ ही लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में नए निवेश के रास्ते खुलेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा बूस्ट मिलेगा।