नोएडा-ग्रेटर नोएडा में बड़े एक्शन की तैयारी, होटल-मॉल से अस्पताल और पीजी तक होगा सुरक्षा ऑडिट, नियम तोड़ने वालों पर सख्ती

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गौतमबुद्धनगर: जिले में संभावित आपदाओं और अग्निकांड जैसी घटनाओं से बचाव को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्य विकास अधिकारी भालचंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के ऑडिटोरियम में होटल, रेस्टोरेंट, मैरिज हॉल, मॉल, क्लब, बार, सिनेमा हॉल, गेमिंग जोन, अस्पताल, स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, कोचिंग सेंटर, पीजी और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों के संचालकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में सुरक्षा मानकों के पालन और आपदा प्रबंधन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई।

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि गौतमबुद्धनगर एक प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक जिला है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग विभिन्न संस्थानों और प्रतिष्ठानों में आते-जाते हैं। ऐसे में जन-धन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाल के अग्निकांडों को देखते हुए जिले के सभी हाईराइज भवनों, होटलों, अस्पतालों, मॉल, शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों और सार्वजनिक भवनों में विशेष संयुक्त अग्नि सुरक्षा निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा।

फायर एनओसी और सुरक्षा उपकरणों की होगी जांच

बैठक में सभी संस्थानों को निर्देश दिए गए कि उनकी फायर एनओसी वैध और अद्यतन होनी चाहिए। फायर अलार्म सिस्टम पूरी तरह कार्यशील रहे, पर्याप्त अग्निशमन यंत्र उपलब्ध हों और स्प्रिंकलर व हाइड्रेंट सिस्टम नियमित रूप से संचालन की स्थिति में बनाए रखें। साथ ही आपातकालीन निकास मार्ग बाधारहित रखने और दिशा सूचक बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए गए।

फायर सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य, लापरवाही पर होगी कार्रवाई

मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि अग्निशमन विभाग संवेदनशील संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट करेगा। जिन संस्थानों में फायर एनओसी नहीं होगी या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर सीलिंग, संचालन प्रतिबंध और अन्य वैधानिक कदम भी उठाए जाएंगे।

अस्पतालों के लिए विशेष निर्देश जारी

अस्पतालों को आपदा प्रबंधन टीम गठित करने, अद्यतन आपदा प्रबंधन योजना तैयार रखने और ट्रॉमा व आपातकालीन सेवाओं को हर समय सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए। ऑक्सीजन प्लांट, मेडिकल गैस पाइपलाइन, वेंटिलेटर, जीवनरक्षक दवाओं, आपदा किट और अतिरिक्त बेड की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। अस्पतालों में सीसीटीवी निगरानी, 24 घंटे कंट्रोल रूम और पब्लिक एड्रेस सिस्टम को प्रभावी बनाए रखने को कहा गया।

स्कूल, कॉलेज और पीजी में नियमित मॉक ड्रिल होगी

प्रशासन ने निर्देश दिए कि स्कूलों, कॉलेजों, कोचिंग संस्थानों, हॉस्टलों और अन्य सार्वजनिक प्रतिष्ठानों में नियमित मॉक ड्रिल आयोजित की जाए। कर्मचारियों, विद्यार्थियों और संबंधित कार्मिकों को आपातकालीन निकासी, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रतिक्रिया का प्रशिक्षण दिया जाए। प्रत्येक संस्थान को अपनी अद्यतन आपदा प्रबंधन योजना तैयार कर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को उपलब्ध करानी होगी। साथ ही एक नामित इमरजेंसी इंचार्ज भी नियुक्त करना अनिवार्य होगा।

विद्युत सुरक्षा पर भी रहेगा फोकस

अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व अजीत कुमार सिंह ने विद्युत सुरक्षा को लेकर विशेष निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि सभी प्रतिष्ठानों में ओवरलोडिंग, जर्जर तारों, शॉर्ट सर्किट की संभावनाओं और विद्युत उपकरणों की नियमित जांच कराई जाए। सुरक्षा मानकों के अनुरूप वायरिंग, अर्थिंग, एमसीबी और अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए विशेष विद्युत सुरक्षा अभियान भी चलाया जाएगा।

सुरक्षा को औपचारिकता नहीं, जिम्मेदारी समझें

मुख्य विकास अधिकारी ने सभी संचालकों और प्रबंधकों से अपील की कि सुरक्षा को केवल औपचारिक प्रक्रिया न समझें, बल्कि अपनी संस्थागत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं। उन्होंने कहा कि प्रभावी आपदा प्रबंधन योजना, नियमित प्रशिक्षण, मॉक ड्रिल, फायर सेफ्टी ऑडिट और सुरक्षा मानकों का पालन ही किसी भी संभावित आपदा से जन-धन की रक्षा का सबसे प्रभावी तरीका है।

बैठक में पुलिस प्रशासन, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, विद्युत सुरक्षा विभाग और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया तथा सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए अपने सुझाव भी साझा किए।

 

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