बेंगलुरु: कर्नाटक सरकार ने अपनी बहुचर्चित ‘पांच गारंटी’ योजनाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिनका नाम राज्य की मतदाता सूची में दर्ज होगा। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि योजनाओं का लाभ सिर्फ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक पहुंचे और किसी भी तरह की अनियमितता या अपात्र व्यक्तियों को लाभ मिलने पर रोक लगाई जाए।
विधान सौधा में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान डीके शिवकुमार ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ लेने के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना अनिवार्य होगा। उन्होंने लोगों से विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान अपना नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करने की अपील भी की।
वोटर लिस्ट में नाम नहीं तो नहीं मिलेगा लाभ
समीक्षा बैठक में डीके शिवकुमार ने कहा कि ‘गृह ज्योति’ समेत अन्य गारंटी योजनाओं का लाभ केवल पंजीकृत मतदाताओं तक सीमित रहेगा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं होगा, वे इन योजनाओं के लाभार्थी नहीं माने जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इस कदम से वास्तविक लाभार्थियों की पहचान आसान होगी और योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
दूसरे राज्यों के लोगों पर सरकार सख्त
बैठक के दौरान यह जानकारी भी सामने आई कि कुछ ऐसे लोग भी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं जो दूसरे राज्यों के मतदाता हैं, लेकिन कर्नाटक में रह रहे हैं।
इस पर नाराजगी जताते हुए डीके शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ केवल कर्नाटक के पात्र नागरिकों को मिलना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे मामलों की पहचान कर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए।
फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर कसा जाएगा शिकंजा
समीक्षा बैठक में विभिन्न योजनाओं में सामने आ रही गड़बड़ियों और फर्जी लाभार्थियों के मामलों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि कई मामलों में योजना की राशि यूपीआई खातों और राज्य के बाहर स्थित बैंक खातों में भेजी जा रही है।
इस पर सरकार ने निर्देश दिया कि लाभ की राशि केवल राज्य के पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे और किसी भी तरह के संदिग्ध भुगतान को रोका जाए।
मृत लाभार्थियों को भी मिल रही थी सहायता राशि
बैठक में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में मृत लाभार्थियों के नाम पर भी भुगतान जारी था। इस पर डीके शिवकुमार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए अधिकारियों को लाभार्थियों का रिकॉर्ड वास्तविक समय में अपडेट करने के निर्देश दिए।
सरकार का कहना है कि लाभार्थी डेटा को लगातार अपडेट करने से ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सकेगी।
गृह लक्ष्मी योजना में सामने आईं बैंकिंग समस्याएं
समीक्षा के दौरान यह भी पता चला कि ‘गृह लक्ष्मी’ योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि कई मामलों में लाभार्थियों के खातों में पहुंचते ही पुराने ऋणों की किश्तों के रूप में काट ली गई। इससे प्रभावित महिलाओं ने अपने बैंक खाते तक बदल लिए।
डीके शिवकुमार ने कहा कि लाभार्थियों को ऐसी समस्याओं का सामना नहीं करना चाहिए और इस दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
60 करोड़ रुपये के भुगतान में मिली गड़बड़ी
महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि ‘गृह लक्ष्मी’ योजना की राशि एक ही बैंक खाते के माध्यम से कई लाभार्थियों को भेजी गई। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग तीन लाख किस्तों के जरिए करीब 60 करोड़ रुपये वितरित किए गए।
ऐसी गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ने निर्देश दिया है कि लाभार्थियों के खाते में राशि जमा होते ही उन्हें स्वचालित वॉयस संदेश भेजा जाए, ताकि भुगतान की जानकारी तुरंत मिल सके।
जानिए क्या हैं कर्नाटक की पांच प्रमुख गारंटी योजनाएं
गृह ज्योति योजना: इस योजना के तहत प्रत्येक घर को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाती है। अब तक लगभग 1.65 करोड़ लाभार्थी इसका फायदा उठा चुके हैं।
गृह लक्ष्मी योजना: परिवार की महिला मुखिया को हर महीने 2,000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
अन्न भाग्य योजना: बीपीएल परिवारों के प्रत्येक सदस्य को प्रति माह 10 किलोग्राम चावल उपलब्ध कराया जाता है। जुलाई 2023 से दिसंबर 2024 तक इस योजना के तहत 11,561.05 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा 4.44 करोड़ लाभार्थियों को हर महीने 5 किलोग्राम अतिरिक्त चावल भी दिया जा रहा है।
शक्ति योजना: महिलाओं को राज्य परिवहन की गैर-लक्जरी बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा दी जाती है। मई 2026 तक महिलाओं द्वारा 763 करोड़ मुफ्त यात्राएं की जा चुकी हैं, जिनका कुल टिकट मूल्य लगभग 20,047.69 करोड़ रुपये बताया गया है। आगामी शैक्षणिक सत्र में करीब 10 लाख छात्रों को मुफ्त बस पास जारी किए जाने की उम्मीद है।
युवा निधि योजना: 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के बेरोजगार स्नातकों को प्रति माह 3,000 रुपये तथा बेरोजगार डिप्लोमा धारकों को 1,500 रुपये मासिक भत्ता दो वर्षों तक प्रदान किया जाता है।