भारत बनेगा ग्रीन एनर्जी का वैश्विक केंद्र, 2070 तक नेट-जीरो का लक्ष्य; ऑस्ट्रेलिया के निवेशकों को पीएम मोदी का बड़ा संदेश

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मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को संबोधित करते हुए भारत को वैश्विक निवेश का प्रमुख केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि भारत अक्षय ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जलविद्युत, ग्रीन हाइड्रोजन, सौर मॉड्यूल और पवन टरबाइन के लिए मजबूत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है। उन्होंने निवेशकों से इन क्षेत्रों में दीर्घकालिक साझेदारी का आह्वान किया।

2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य

प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक भारत में 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के विशाल यूरेनियम भंडार और इस क्षेत्र की विशेषज्ञता भारत की परमाणु ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में निवेश का दिया न्योता

पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों को भारत के बंदरगाह, हवाई अड्डे, सड़क, रेलवे और शहरी बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में दीर्घकालिक निवेश के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं तथा भारत का विशाल बाजार और ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता दोनों देशों के लिए लाभकारी साझेदारी का आधार बन सकती है।

इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की प्रौद्योगिकी, पूंजी और संसाधन भारत की विकास यात्रा को और गति दे सकते हैं। उन्होंने विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, खनन, बुनियादी ढांचा, शहरी विकास, विमानन, लॉजिस्टिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वित्तीय प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल अर्थव्यवस्था को दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र बताया।

व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने की अपील

प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के 200 से अधिक उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर समान दृष्टिकोण और दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत संबंध आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं। उन्होंने वर्ष 2022 में हुए व्यापार समझौते का उल्लेख करते हुए व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की अपील की।

उन्होंने रेयर अर्थ्स, लिथियम, बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रक्षा क्षेत्र में संयुक्त निवेश बढ़ाने का भी आह्वान किया। साथ ही भारत के राज्यों और ऑस्ट्रेलिया के प्रांतों के बीच प्रत्यक्ष साझेदारी को मजबूत करने का सुझाव दिया।

 

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