Delimitation Bill: 360 के जादुई आंकड़े से सिर्फ 6 वोट दूर NDA! क्या मानसून सत्र में पास होगा परिसीमन विधेयक?

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नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र से पहले डीलिमिटेशन (परिसीमन) विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पिछले संसद सत्र में केंद्र सरकार दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर पाने के कारण इस संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित नहीं करा सकी थी। अब बदले हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच एक बार फिर इस विधेयक को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और माना जा रहा है कि सरकार इसे दोबारा सदन में ला सकती है।

पिछली बार 54 वोट से पीछे रह गई थी सरकार

लोकसभा में किसी भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है। पिछले सत्र में सरकार आवश्यक 360 मतों के मुकाबले 54 वोट कम होने के कारण डीलिमिटेशन विधेयक पारित नहीं करा सकी थी।

बदले समीकरणों से मजबूत हुआ एनडीए का गणित

वर्तमान में लोकसभा में 540 सदस्य हैं और संवैधानिक संशोधन के लिए 360 सांसदों का समर्थन जरूरी है। एनडीए के पास फिलहाल 298 सांसद हैं। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार यदि तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसद और उद्धव ठाकरे गुट के 6 सांसद सरकार का समर्थन करते हैं तो एनडीए की संख्या 324 तक पहुंच सकती है। इसके बावजूद सरकार बहुमत के आंकड़े से 36 वोट पीछे रहेगी।

डीएमके और एनसीपी (शरद पवार) पर टिकी नजर

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि यदि द्रमुक के 22 सांसद और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के 8 सांसद सरकार के पक्ष में आते हैं तो एनडीए का आंकड़ा 354 तक पहुंच सकता है। इसके बाद भी दो-तिहाई बहुमत के लिए सरकार को 6 और सांसदों के समर्थन की आवश्यकता होगी। ऐसे में छोटे दलों और निर्दलीय सांसदों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सुप्रिया सुले ने दिया 50 प्रतिशत सीट बढ़ाने के प्रस्ताव का संकेत

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने पहले सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने कहा कि यदि पूरे देश में समान रूप से सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव लाया जाता है तो उस पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वह इस संबंध में सदन में आधिकारिक संशोधन प्रस्ताव लाने के लिए भी तैयार हैं।

क्या INDIA गठबंधन की बढ़ेगी चुनौती?

सुप्रिया सुले के बयान के बाद विपक्षी INDIA गठबंधन के भीतर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) और द्रमुक सरकार के प्रस्ताव का समर्थन करेंगे या विपक्ष अपनी एकजुटता बनाए रखेगा। हालांकि सुप्रिया सुले ने एनडीए में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन के साथ मिलकर ही आगे के राजनीतिक फैसले लेगी।

मानसून सत्र में हो सकती है बड़ी राजनीतिक परीक्षा

सोमवार से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र पर सभी दलों की नजरें टिकी हैं। यदि सरकार डीलिमिटेशन विधेयक सदन में पेश करती है तो यह मौजूदा राजनीतिक समीकरणों की सबसे बड़ी परीक्षा मानी जाएगी। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार इस बार दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा हासिल कर विधेयक पारित करा पाती है या नहीं।

 

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